स्वच्छ राजनीति पर क्या बोले हमारे शहर के अधिवक्ता जाने

ranjeet pardeshi

Publish: May, 17 2018 10:01:47 PM (IST)

Burhanpur, Madhya Pradesh, India
स्वच्छ राजनीति पर क्या बोले हमारे शहर के अधिवक्ता जाने

- निजाम ए कोहन बदल डाले, मगर ये बात फख्त मेरे बस की बात नहीं

- पत्रिका महाअभियान
- बदलाव के नायक
बुरहानपुर. देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाले अधिवक्ताओं ने पत्रिका के बदलाव के नायक की मुहिम में हिस्सा लेकर अपने विचार रखे। गुरुवार को जिला बार एसोसिएशन के हॉल में हुई संगोष्ठी में आवाज उठी निजाम ए कोहन बदल डाले, मगर ये बात फख्त मेरे बस की बात नहीं। आओ मेरे मुल्क के वकीलो आओ। ये बात हम सब की है दो चार दस के बस की बात नहीं। आज के समय में राजनीति में जो घिनौनापन आ गया है, उसे दूर करने के लिए पत्रिका ने जो मुहिम शुरू की है, वास्तव में इससे देश में बदलाव आएगा। एक अधिवक्ता ही चेंजमेकर के रूप में शामिल होकर देश की राजनीति में परिवर्तन कर सकता है। इतिहास में भी देश को आजाद कराने में अधिवक्ताओं की भूमिका अहम रही थी, आज भी देश में राजनीति को स्वच्छ करने में अधिवक्ताओं को ही मैदान में उतरना होगा। सभी ने विचार रखकर स्वच्छ राजनीति का संकल्प भी लिया।


अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेश कोरावाला ने कहा कि पत्रिका की यह मुहिम बहुत की सराहनीय है। जिसकी आज आवश्यकता इस देश को है। समय आ गया है, हम भी देश ेमें बदलाव लाने के लिए पत्रिका के बदलाव के नायक बनकर देश की राजनीति में आए। वर्तमान में हम नहीं जागे तो भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकते।

अधिवक्ता संघ के सचिव विनय शाह ने कहा कि अधिवक्ताओं ने ही देश की आजादी की लड़ाई में भाग लेकर अंग्रेजों को इस देश से भगाया था। आज पुन: पत्रिका ने हम अधिवक्ताओं को चेंज मेकर अभियान से जोड़कर जगाया। इसके लिए पत्रिका का अनंत आभार, धन्यवाद। यदि अधिवक्ता जागरूक हो जाएं तो बहुत बड़े बदलाव के नायक बन सकते हैं।

अधिवक्ता संतोष देवताले ने शायरी पढ़ते हुए कहा हम तो चाहते हैं निजाम ए कोहन बदल डाले, मगर ये बात फख्त मेरे बस की बात नहीं। आओ मेरे मुल्क के वकीलो आओ। ये बात हम सब की है दो चार दस के बस की बात नहीं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में अधिवक्ताओं का बड़ा योगदान रहा। अधिवक्ता ही समाज में क्रांतिकारी ला सकता है।

अधिवक्ता खलील अंसारी ने कहा कि राजनीति में इस बात का संकल्प लिया जाए की इस मूल्क की आजादी को, सेकुलरिज्म को, इंसानियत को बचाने में हर वह मुमकीम कुर्बानी देंगे, जो जरूरी होगी। जिससे हमारे मुल्क बच सके। पत्रिका को बधाई देता हूं, जो इस मुहिम को शुरू किया। राजनीति में अधिवक्ताओं को अपना रोल अदा करना चाहिए। तभी राजनीति में घिनौना काम बंद होगा।

अधिवक्ता अनिल शाह ने कहा कि अब अधिवक्ताओं की अस्मिता को जागरुक करने की आवश्यकता है। राजनीति को अस्वचछता से हटाकर स्वच्छता की ओर अधिवक्ता ही ले जा सकता है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी है भावी देश का निर्माण करना होगा। सूई दूसरी ओर न घूमाते हुए अपनी ओर लाकर देश की राजनीति को स्वच्छ करना होगा।

ईश्वर नवथरे ने कहा कि अधिवक्ता समाज में काम करने के लिए है, लेकिन अनशोसल व्यक्ति समाज पर राज कर रहा है। मीडिया की भी इसमें अहम भूमिका जरूरी हैं, तभी इसमें बदलाव आएगा। मीडिया का काम ही सही को सामने लाने का है। समाज के सामने सही तरीके से रख दिया तो राजनीति में गंदगी समाप्त हो जाएगी।

अधिवक्ता उबेद शेख ने कहा कि समाजवाद, पूंजी वाद, फांसी वाद को राजनीति में अपनाया जाता है। फांसी वाद में सारे बुरे लोग जुड़ जाते हैं। पूंजी वाद में पूंजीपति। लेकिन अच्छाई उन लोगों की झोली में जाती है, जो राजनीति को समाजवाद की तरफ ले जाता है। अधिवक्ता के माध्यम से समाजवाद की तरफ राजनीति को ले जाएंगे तभी देश को सुधार सकेंगे।

अधिवक्ता हेमेंद्र गोविंजीवाला ने कहा कि राजनीति में गंदगी नहीं है। राजनैति में घिनौनापन है। कोई भी समझदार व्यक्ति या कोई समाज के प्रति गहरी सोच रखता है वह राजनीति में आना ही नहीं चाहता। नीचे से ऊपर आए हुए ऐसे बहुत कम लोग हैं जो राजनीति में आए हैं। राजनीति को साफ करने का बीड़ा केवल अधिवक्ता उठा सकता है, क्योंकि उनका कलेजा चुनौतियों का स्वीकार करने का रहता है।

अधिवक्ता शाकीर साब ने कहा कि वर्तमान में राजनीति में सेवा का स्थान स्वार्थ ने ले लिया है। जिस कारण सारी समस्या खड़ी हो गई है। एक जमाना यह था कि भारत को आजाद कराने में उस लड़ाई में अधिवक्ताओं की सबसे अहम भूमिका रही। आज अच्छे लोग राजनीति से डर रहे हैं। प्रत्येक आदमी को इस देश को बचाने के लिए हमें आगे आना होगा। भविष्य को सुधारने के लिए वर्तमान में वकीलों को राजनीति में आगे आना चाहिए।

अधिवक्ता मोहनलाल प्रजापति ने कहा कि राजनीति में ऐसे व्यक्ति की सुचिता एक प्रयास अच्छा किया है पत्रिका ने। पत्रिका समूह हमेशा जन सरोकार के काम करता है। यह भी एक सराहनीय काम है, राजनीति में स्वच्छा भी देश की भावना से जुड़ा मामला है। हमें भी अंतरआत्मा को जगाकर राजनीति की सुचिता के लिए काम करना होगा।

कार्यक्रम में अधिवक्तागण जहीर हुसैन, कस्तुरसिंह टांक, श्याम देशमुख, विजय जवादे, हेमंत मेढ़े, सुरेश, सुरेखा, संगीता रोखड़े, नितिश गुप्ता, सोनू सोनवणे, मुकुंद सन्यास, अनिल बिल्लोरे, गोपाल भगत, जय चौकसे, राकेश मिश्रा, जीतेंद्र छतरिया, हर्षद पटेल, वीपी शाह, राजेश बीडियारे, मनोज मेहरा, वीरेंद्र शाह, प्रमोद पाटिल, प्रकाशचंद तिवारी, शांतनु विपट, राजकुमार मेहता, संदीप शाह आदि मौजूद थे।

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