scriptThe transfer made on the recommendation of the minister is illegal | हाईकोर्ट का फैसलाः मंत्री की अनुशंसा पर किया गया तबादला अवैध | Patrika News

हाईकोर्ट का फैसलाः मंत्री की अनुशंसा पर किया गया तबादला अवैध

बुरहानपुर का मामला: नगर निगम कमिश्नर का तबादला निरस्त, टिप्पणी: मंत्री की ओर से इसके लिए दबाव बनाने का हस्तक्षेप सर्वथा अनुचित है।

बुरहानपुर

Published: May 20, 2022 03:14:11 pm

जबलपुर/बुरहानपुर। हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि तबादले का कोई भी आदेश जो विशुद्ध रूप से एक मंत्री की अनुशंसा पर जारी किया गया हो, विधि की दृष्टि में अवैध है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस पीके कौरव की बेंच ने इस मत के साथ बुरहानपुर नगर निगम कमिश्नर श्याम कुमार सिंह का तबादला आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने उनकी जगह स्थानांतरित किए गए संजय मेहता को उन्हें प्रभार सौंपकर सरकार के आगामी आदेश का इंतजार करने के निर्देश दिए।

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2 साल में 3 तबादले

श्याम कुमार सिंह की ओर से यह अपील दायर की गई। बताया गया कि याचिकाकर्ता का दो साल में तीन बार तबादला किया गया। कोर्ट ने कहा, चयनित जनप्रतिनिधियों को सदैव सरकारीकर्मी के तबादले की अनुशंसा का अधिकार होता है, पर ऐसी अनुशंसा उचित कारण से होनी चाहिए। अधिकारियों के इनकार के बावजूद मंत्री की ओर से इसके लिए दबाव बनाने का हस्तक्षेप अनुचित है।

मंत्री ने बनाया दबाव

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि उक्त तबादला स्थानीय चयनित जनप्रतिनिधि की अनुशंसा पर किया गया। कोर्ट ने मामले के दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद पाया कि स्थानीय सांसद ने अपीलकर्ता का तबादला कर उनकी जगह संजय मेहता को पदस्थ करने की अनुशंसा की। यह फ़ाइल नगरीय प्रशासन विभाग आयुक्त के पास गई लेकिन उन्होंने अपीलकर्ता के तबादले का अनुमोदन नहीं किया। विभाग के प्रमुख सचिव ने भी यही किया। इस पर विभाग के मंत्री ने 7 मार्च 2022 को अपीलकर्ता के तबादले की अनुशंसा कर फ़ाइल चीफ मिनिस्टर के समक्ष भेजकर अनुमोदन का दबाव बनाया गया । 6 अप्रेल 2022 को सीएम के अनुमोदन के बाद 7 अप्रेल को तबादले के आदेश जारी कर दिए गए।

तबादले के मामले में ऐसा दखल अनुचित

कोर्ट ने कहा कि चयनित जनप्रतिनिधियों को सदैव सरकारी कर्मी के तबादले की अनुशंसा का अधिकार होता है। लेकिन ऐसी अनुशंसा उचित कारण से होनी चाहिए। विभागीय अधिकारियों के इनकार के बावजूद मंत्री की ओर से इसके लिए दबाव बनाने का हस्तक्षेप सर्वथा अनुचित है। कोर्ट ने कहा कि मंत्री के दबाव के अलावा उक्त तबादले के लिए कोई प्रशासनिक आधार नहीं है और ना ही यह जनहित में है। अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह के साथ अधिवक्ता ऋषभ सिंह ने पैरवी की।

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