ये है स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार जिले के अस्पताल के हाल

- अनदेखी
- अस्पताल में पर्याप्त जगह होने के बाद भी समस्याओं का निराकरण नहीं
- जमीन पर लेटे मरीज

बुरहानपुर. टीबी अस्पताल में पसरी धूल, खाली पड़े बेड। मेडिकल और सर्जिकल वार्ड में जमीन पर लेटे मरीज। बिगड़े हालात केवल यहां तक सीमित नहीं है। लिट बंद होने से स्ट्रेचर पर मरीज को लेटाकर वार्डबॉय को धक्का देते हुए तल मंजिल से पहली मंजिल तक लाने की मजबूरी। यह नजारा कही ओर का नहीं बल्कि जिला अस्पताल का है। जहां स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार वाले जिले में अव्यवस्था का आलम देखने को मिलता है। अब तक यहां व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं आया है।
पत्रिका लाइव
जिला अस्पताल में हमेशा अव्यवस्थाओं का आलम रहा है। सोमवार को जब पत्रिका की टीम कैमरा लेकर यहां पहुंची तो कईखामियां उजागर की। पहले तो टीबी वार्ड में पहुंचे जहां टीबी के मरीजों के लिए दूसरी मंजिल पर वार्ड बनाया गया था। यहां देखा कि पूरा परिसर धूल दूसरित हो रहा है। जगह-जगह दीवार जाले खा रही है। पता चला टीबी वार्ड को पहली मंजिल पर ही १२२ नंबर के कमरे में किया गया है। यहां पहुंचे तो पूरा कमरा खाली पड़ा। लोर पूरा धूल मिट्टी से पटा हुआ। कौने में पड़ा रद्दी का ढेर और बहता गंदा पानी। यह हाल था टीबी वार्ड का। जब नर्स ड्यूटी रूम में पहुंचकर बात की तो बताया गया अभी टीबी का मरीज नहीं है। इसलिए वार्डखाली है।
सामान्य वार्ड में कर रहे टीबी के मरीज
बताया गया कि सामान्य वार्ड सर्जिकल और मेडिकल वार्ड में ही टीबी के मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। जबकि यह पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है। टीबी की बीमार इंफेक्शन से होती है, ऐसे में सामान्य मरीजों को भी यह बीमारी अपनी चपेट में ले सकती है। सर्जिकल वार्ड में हाल यह था कि यहां बेडकम पड़े गए, मरीजों को जमीन पर लेटाकर इलाज किया गया। हां यह जरूर था कि जमीन पर गद्दे डाले हुए थे, इस पर मरीज लेटे थे।
मरीजों को रैंप से करते हैं उतारना चढ़ाना
अस्पताल में लिट तो लगी है, लेकिन कभी इसका उपयोग नहीं किया गया। अस्पताल शिट होने से पहले यहां कार्यालयीन विभाग जरूर आ गए थे, जब अधिकारी-कर्मचारी लिट से आना जाना करते थे। इस समय लिटका बिजली बिल ही २० लाख रुपए बना था। यह बिल देखने के बाद तो अस्पताल प्रबंधन की कभी हिमत नहीं हुई इसे चालू करने की। वार्डबॉय अब मरीजों को स्ट्रेचर पर लेटाकर से धक्का देते हुए रैप से पहले तल तक पहुंचते हैं। जहां पर सर्जिकल वार्ड बना है।
सुबह दवाईके लिए भी विवाद
सोमवार को अस्पताल खुलने के बाद यहां बड़ी भीड़ लग जाती है। ऐसे में दवाई के लिए खड़े मरीजों में आगे निकलने की होड़ में विवाद की स्थिति भी बनती है। यही हाल सोमवार दोपहर १२.३० बजे देखने को मिला। जब मरीजों का आगे निकलने की बात को लेकर विवाद हुआ। हालांकि आपसी समझाइश पर यह मामला शांत हुआ।
- टीबी के मरीजों को टीबी वार्ड में ही भर्तीकरते हैं। जब तक पता नहीं चलता तब तक मेडिकल वार्डमें मरीज रहता है, जैसे ही जांच में सामने आता है उसे टीबी वार्ड में कर देते हैं। यह मरीज ज्यादा वार्ड में रहते नहीं है। बोतल लगकार चले जाते हैं। रही सफाईकी बात तो यह वार्ड अभी बना है। इसलिए सफाईनहीं हुई होगी। नया ठेकेदार आ गया है नए सफाईकर्मियों की भर्तीचल रही है। यहां सफाईरहेगी। लिटमेन भी आते ही लिट चालू कर दी जाएगी।
- डॉक्टर शकील अहमद खान, सिविल सर्जन

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