आउटलुक 2019 : उतार-चढ़ाव के साथ इन अहम पहलुओं पर रहेगी बाजार की नजर

आउटलुक 2019 : उतार-चढ़ाव के साथ इन अहम पहलुओं पर रहेगी बाजार की नजर

श्रीमान बी. गोपकुमार, ईडी एंव सीईओ, रिलायंस सिक्योरिटीज

नई दिल्ली। साल 2018 में भारतीय इक्विटी बाजार मिश्रित रहा। जिसमें ग्लोबल ट्रेड वार और कच्चे तेल की कीमतों जैसे फैक्टर ने साल भर अहम भुमिका निभाने में कामयाब रही। भारतीय बाजार में आईएल एंड एफएस के मामले में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई । खासकर सितंबर और अक्टूबर 2018 के महीने में। हालांकि कुछ दिन में ही इस मामले से बाजार ने अपने आप को रिकवर कर लिया। जिसके बाद निफ्टी 50 में 3.2फीसदी की बढ़त देखने को मिली, तो वही बीएसई के सेंसेक्स में 5.9 फीसदी की रिकवरी देखी गई। हालांकि बाजार पुजींकरण की बात करें तो साल 2018 में इंडियन मार्केट में 7.2लाख करोड़ का मार्केट कैप घट गया। जिसमें लार्ज कैप का हिस्सा ज्यादा रहा। वहीं मिडकैप औऱ स्मालकैप इंडेक्स में भी अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान निफ्टी के मिडकैप इंडेक्स में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई तो वहीं स्मालकैप इंडेक्स 30 फीसदी तक लुढ़क गया। हालांकि इस दौरान घरेलू निवेशकों ने बाजार पर अपना भरोसा कायम रखा और साल 2018 में करीब 1.1 लाख करोड़ का निवेश किया। जबकि इससे पहले एफपीआई के .4.5बिलियन डॉलर के मुकाबले घरेलू निवेशकों ने साल 2017 में 1.17लाख करोड़ का निवेश किया था ।

राजनीतिक हलचल, ब्याज दर और कैपेक्स पर नजर

साल 2019 की बात करें तो तो पहली छमाही में लोकसभा चुनावों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। साल 2019 में बाजार की चाल इन तीन अहम पहलुओं के साथ चलेगी। जिसमें पहला, एक ऐसी सरकार जिसे पूर्ण बहुमत हासिल हो। दूसरा, निजी कैपेक्स के अंतराल में कमी आए और तीसरा, ब्याज दरों का कम होना। अगर 2019 में पूर्ण बहुमत वाली सरकार आती है तो भारतीय बाजार को इसका बहुत फायदा मिलेगा। हालांकि जबतक चुनावों के नतीजे नहीं आ जाते तबतक बाजार की चाल ग्लोबल संकेतों और इंडिया इंक पर ही निर्भर करेगा।

यहां ध्यान देने योग्य बात है कि 2019 के पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ में सुधार, ग्रॉसफिक्स्ड कैपिटल फोरमेशन यानि जीएफसीएफ और बैंक के क्रेडिट ग्रोथ में सुधार में हालात में बदलाव देखा जा सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें जो कि ( पहले से ही 70 फीसदी के आंकडें को पास कर चुकी है) 2019 के निजी कैपेक्स साइकल में एक सुधार की बयां बिखेर सकता है। इससे उद्योगों की अर्निग्स यानि कमाई में इजाफा देखने को मिल सकता है। हालांकि इसका पूरा असर चुनावी नतीजों के बाद ही देखा जा सकेगा। इसके अलावा ट्रे़ड वार के चलते ग्लोबल ग्रोथ की धीमी गति, कच्चे तेल की कीमतें महंगाई में बड़ी भुमिका अदा करेंगी। वहीं खुदरा महंगाई की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक को इसे भी एक रेंज में सीमित करना होगा। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक फरवरी 2019 की पॉलिसी बैठक ने तो नहीं लेकिन अप्रैल की बैठक में इसपर काबू पा सकने में कामयाब हो जाएगी। ब्याज दरों का असर खासकर एनबीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर खासा देखा जा सकेगा।

उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रुपए में स्थिरता, डेफिसिट में सुधार के कारण कुछ अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। जिसके चलते साल 2019 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश कराने में कामयाब हो सकेगा।

बाजार में जारी रहेगा उतार-चढ़ाव का दौर

साल 2019 के पहली छमाही तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर देखन को मिल सकता है। हालांकि पहली छमाही के बाद सरकार की स्थिति साफ होन के बाद इसमें बदलाव देखे जाएंगे। साथ ही महंगाई दरों में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी भी स्थिति में काफी बदलाव की गुंजाइश देखी जा सकेगी। इसलिए निवेशकों को सलाह है कि वे क्वालिटी स्टॉक में ही निवेश करें। जिनका वैल्युएशन अच्छा हो या फिर वे अपने ऐतिहासिक लो लेवल से बेहतर ट्रेड कर रहे हों। मिडकैप और स्मॉलकैप में कई ऐसे स्टॉक्स हैं जिनमें साल 2018 के मुकाबले काफी सुधार देखने को मिल सकता है।

अच्छा पोर्टफोलियो बनाने का समय

इसिलिए हमें उम्मीद है कि ये सही समय है जब निवेशक बाजार से न भागें, वो एसआईपी के जरिए निवेश शुरु करें और धीरे धीरे अपने को बढ़ाकर इक्विटी तक लें जाएं। हालांकि बाजार के उतार-चढ़ाल से घबराने की बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा करना सीखें। जब बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिख रहा हो तो असमंजस में आने की बजाय अपने निवेश को अलग अलग तरीके से बांटे। जैसे कि अपने निवेश के 60 फीसदी हिस्से को लार्ज कैप में और 40 फीसदी हिस्से को मिडकैप में लगाएं औऱ साथ ही स्मॉलकैप पर भी नजर बनाएं रखें। ताकि तुरंत कैश उपलब्ध हो सकें। उदाहरण के तौर पर साल 2019 में आप अपने निवेश का 80 से 85 फीसदी हिस्सा लार्ज कैप स्टॉक्स में रखें। और 15 से 16 फीसदी हिस्से को मिडकैप पर निवेश करें, ताकि आपका बैलेंस बना रहे और आप एक अच्छा पोर्टफोलियों बनाने में कामयाब हो सकें।

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