scriptAmul appeals to PM Narendra Modi to delay plastic straw ban | अमूल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्लास्टिक स्ट्रॉ बैन में देरी करने की अपील की, कहा- किसानों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव | Patrika News

अमूल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्लास्टिक स्ट्रॉ बैन में देरी करने की अपील की, कहा- किसानों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

Amul: अमूल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यालय को एक पत्र लिखकर प्लास्टिक स्ट्रॉ बैन में देरी करने की अपील की है। अमूल ने अपने अपील में कहा है कि प्लास्टिक स्ट्रॉ बैन में अभी बैन लगने से किसानों और दूध की खपत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Published: June 09, 2022 03:06:07 pm

Amul: भारत के सबसे बड़े डेयरी समूह अमूल (Amul) ने सरकार से प्लास्टिक स्ट्रा को बैन (प्रतिबंध) में देरी करने की अपील की है। इसके लिए अमूल ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा है। अमूल ने अपने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से कहा है कि प्लास्टिक स्ट्रॉ में अभी बैन लगने से दुनिया के सबसे बड़े कमोडिटी उत्पादक में किसानों और दूध की खपत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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Amul appeals to PM Narendra Modi to delay plastic straw ban
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार 1 जुलाई से प्लास्टिक स्ट्रा में प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। एक अनुमान के हिसाब से हर साल प्लास्टिक स्ट्रा का 790 मिलियन डॉलर (79 करोड़ रुपए) का व्यापार है। वहीं अमूल हर साल अरबों ऐसे छोटे प्रोडक्ट बेचता है, जिनमें प्लास्टिक के स्ट्रॉ लगे होते हैं। इसके कारण यह प्रतिबंध अमूल के व्यापार में भी सीधा असर डालेगा। इसके साथ ही कोका-कोला व पेप्सी जैसे ब्रांड के व्यापार में इसका सीधा असर पड़ेगा।
 
 

बैन से पेय पदार्थ हो जाएंगे महंगे

अमूल डेयरी समूह के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि प्लास्टिक स्ट्रॉ अमूल के आठ अरब डॉलर के प्रोडक्ट को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इसके साथ ही अगर सरकार प्रतिबंध में देरी कर देती है तो 10 करोड़ डेयरी किसानों को राहत व लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि देश में 5 रुपए से लेकर 30 रुपए के पेय पदार्थ काफी लोकप्रिय हैं, अगर प्लास्टिक स्ट्रॉ पर बैन लगा तो ये पेय पदार्थ पेपर स्ट्रा यूज करने की वजह से और भी महंगे हो सकते हैं।

ज्यादा टिकाऊ भी नहीं हैं पेपर स्ट्रॉ

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पारले ने भी भारत सरकार को एक पत्र लिखा है, पारले ने पत्र के माध्यम से कहा है कि वैकल्पिक स्ट्रॉ का पर्याप्त मात्रा में स्थानीय उत्पादन नहीं है। इसके साथ ही आयातित कागज और बायोडिग्रेडेबल वेरिएंट लगभग 250% अधिक महंगे हैं। इसके साथ ही पेपर स्ट्रॉ ज्यादा टिकाऊ भी नहीं हैं।

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