टैक्स विवाद के चलते विदेशों में भारत की संपत्तियां जब्त कर सकती है ब्रिटेन की कंपनी केयन

- 1.2 अरब डॉलर का टैक्स विवाद मामला: कंपनी ने भारत पर दबाव बनाने के लिए अमरीकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दर्ज कराया केस, वोडाफोन मामले के बाद भारत सरकार की दूसरी हार ।
- अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल दे चुका है कंपनी के पक्ष में फैसला।
- सदस्यों का ट्रिब्यूनल, एक की नियुक्ति भारत सरकार ने की।
- 10,247 करोड़ की टैक्स डिमांड को गलत बताया।
- 1.6 अरब डॉलर की डिमांड के खिलाफ मामला दायर किया।

By: विकास गुप्ता

Published: 18 Feb 2021, 03:17 PM IST

नई दिल्ली। ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी ने 1.2 अरब डॉलर के टैक्स विवाद मामले में भारत पर दबाव बनाने के लिए एक अमरीकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दर्ज कराया है। ये टैक्स विवाद का मामला मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) से जुड़ा है, जिसमें केयर्न की जीत हुई थी। केयर्न ने भारत को इस मामले में विदेशी संपत्ति जब्त करने की चेतावनी भी दी है। अगर मामले का जल्द हल नहीं निकला, तो केयर्न द्वारा कुल 1.4 अरब डॉलर के भारतीय बैंक खाते, हवाई जहाज और अन्य विदेशी संपत्तियों को जब्त करने की आशंका है। ब्रिटिश फर्म ने उन विदेशी भारतीय संपत्ति की पहचान करना शुरू कर दिया है, जिन्हें जब्त किया जा सकता है। दरअसल, पिछले साल दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने 1.2 अरब डॉलर का ये मामला केयर्न के पक्ष में दिया था। 1.2 अरब डॉलर के साथ ब्याज और लागत भी शामिल होगी, जिसकी कुल राशि 1.4 अरब डॉलर है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि भारत भुगतान के लिए उत्तरदायी है।

यह है केयर्न की मांग -
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केयर्न ने अमरीकी कोर्ट से कहा कि वह इस मामले में राशि की पहचान और पुष्टि करे, जिसमें 2014 के बाद से भुगतान और उस पर अर्धवार्षिक ब्याज शामिल है। केयर्न के इस कदम को भारत की संपत्ति जब्त करके अपना बकाया वसूल करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

दे सकते हैं ऑयल फील्ड-
इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि केंद्र सरकार ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी को 1.4 अरब डॉलर की देनदारी के बदले रत्ना आर-सीरीज जैसे ऑयल फील्ड सौंप सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इससे सरकार को 1.4 बिलियन डॉलर के भुगतान में चूक के चलते विदेशी परिसंपत्तियां जब्त होने से बचाने में मदद मिल सकती है।

तीन सदस्यों के ट्रिब्यूनल का केयर्न के पक्ष में फैसला-
3 मेम्बरों के ट्रिब्यूनल ने (जिसमें एक जज की नियुक्ति भारत सरकार ने की थी) ने 2006-07 में केयर्न एनर्जी से इसके भारतीय व्यापार के लिए सरकार द्वारा 10,247 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड को गलत बताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत ने 2014 में ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किया था। तब भारत सरकार को बेचे गए शेयरों की वैल्यू और प्राप्त किया गया लाभांश लौटाने को भी कहा गया था। साथ ही वे टैक्स रिफंड्स लौटाने को भी कहा गया, जो टैक्स एनफोर्स करने के लिए रोके गए।

यह है पूरा विवाद: इस तरह चला मामला-
टैक्स विवाद का मामला एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में चल रहा था। केयर्न ने मार्च, 2015 में भारत के टैक्स डिपार्टमेंट के 1.6 अरब डॉलर से अधिक की डिमांड के खिलाफ औपचारिक मामला दायर किया था। यह टैक्स विवाद 2007 में उस समय इसकी भारतीय कंपनी की लिस्टिंग से संबंधित था। भारत सरकार ने केयर्न को डिविडेंड के शेयर देने से इनकार करते हुए राशि जब्त कर ली थी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वेदांता के साथ अपने विलय के बाद केयर्न इंडिया में कंपनी के हिस्से के अवशिष्ट शेयरों को समाप्त कर दिया था।

वोडाफोन के खिलाफ की है अपील-
भारत सरकार को इससे पहले वोडाफोन के साथ इसी तरह के 2 अरब डॉलर के मामले में आर्बिट्रेशन में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी है।

विकास गुप्ता
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