कोरोना की दूसरी लहर और लॉकडाउन के बावजूद कंपनियों को नहीं हुआ अधिक नुकसान

सर्वे में कहा गया कि दूसरी लहर में लगे लॉकडाउन को भीड़भाड़ कम करने के लिए प्रयोग किया गया परन्तु आर्थिक गतिविधियों को खुला रखा गया जिसकी वजह से बिक्री प्रभावित नहीं हुई और आम जनता की जेब में भी गत वर्ष की तुलना में ज्यादा पैसा रहा।

By: सुनील शर्मा

Published: 12 Jul 2021, 12:51 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर के चलते आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं जिनके कारण जून तिमाही में कंपनियों की आय में कमी आ सकती है। एक अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में घरेलू कंपनियों की आय इससे ठीक पिछली तिमाही की तुलना में आठ से दस प्रतिशत घट कर लगभग 7.3 लाख करोड़ रुपए रह सकती है। हालांकि सालाना आधार पर परिचालन लाभ में लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावनाएं हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि गत वर्ष लगे सख्त लॉकडाउन के कारण कारोबार पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि इस बार इस तरह नहीं किया गया है। ऐसे में इस वर्ष अधिक लाभ होने के आसार बन रहे हैं।

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जानिए क्यों घटेगी इनकम
चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में घरेलू कंपनियों की आय पिछली तिमाही की तुलना में आठ से दस प्रतिशत घटकर 7.3 लाख करोड़ रुपए रहने की संभावना है। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि जनता के पास पैसा नहीं होने की वजह से लोग लग्जरी आइटम्स की खरीद कम से कम कर रहे हैं। लोग केवल उन्हीं चीजों पर पैसा खर्च कर रहे हैं जो बेहद जरूरी है और जिनके बिना काम नहीं चलाया जा सकता।सालाना आधार पर कंपनियों की इनकम 45 से पचास प्रतिशत तक बढ़ सकती है। यह उछाल निम्न आधार के साथ तुलना पर दिखाई देगा।

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CII की रिपोर्ट में भी किया गया दावा
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा किए गए एक सर्वे में कहा गया है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आर्थिक गतिविधियां अधिक प्रभावित नहीं हुई जिसके कारण अर्थव्यवस्था में अधिक गिरावट नहीं आएगी। सर्वे में कहा गया कि दूसरी लहर में लगे लॉकडाउन को भीड़भाड़ कम करने के लिए प्रयोग किया गया परन्तु आर्थिक गतिविधियों को खुला रखा गया जिसकी वजह से बिक्री प्रभावित नहीं हुई और आम जनता की जेब में भी गत वर्ष की तुलना में ज्यादा पैसा रहा।

भारतीय कंपनियों की इनकम भी बढ़ेगी
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार आने वाले समय में भारतीय कंपनियों की आय में वार्षिक वृद्धि दर लगभग 45 से 50 फीसदी तक रहेगी। क्रिसिल का अनुमान 300 कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित है, जिनका बाजार पूंजीकरण में 55 से 60 फीसदी का योगदान है।

सुनील शर्मा
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