सिक्का इस्तीफा पड़ा भारी: इंफोसिस का स्टॉक एक साल के निचले स्तर पर, मूर्ति ने गवाएं 1000 करोड़

इंफोसिस से विशाल सिक्का के इस्तीफे की खबर के बाद कंपनी के शेयर में 13 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

By: manish ranjan

Published: 18 Aug 2017, 05:27 PM IST

नई दिल्ली. इंफोसिस से विशाल सिक्का के इस्तीफे की खबर के बाद कंपनी के शेयर में 13 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद इंफोसिस का स्टॉक 1 साल के निचले स्तर पर आ गया है। तो वहीं कंपनी को कुल 30000 करोड़ का घाटा हो चुका है। वहीं इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति को भी करारा झटका लगा है। विशाल सिक्का के इस्तीफे के बाद मूर्ति ने एक झटके में 1000 करोड़ रुपए गंवा दिए है। दरअसल गुरुवार को जब बाजार बंद हुआ था तब कंपनी का मार्केट कैप 2.34 लाख करोड़ रुपए का था जो अब घटकर 2.04 लाख करोड़ का रह गया है।


मूर्ति ने ऐसे गंवाए 1000 करोड़


इंफोसिस के शेयर में गिरावट से निवेशकों के साथ-साथ कंपनी के पूर्व चेयरमैन और फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति का वेल्थ 1068 करोड़ रुपए घट गया। कंपनी में नारायण मूर्ति और उनके परिवार के पास कुल 7,90,02,104 शेयर्स यानी 3.44 फीसदी स्टेक हैं। कंपनी में मुर्ति की शेयरहोल्डिंग 0.38%, उनकी पत्नी सुधा मूर्ति की 0.79%, बेटी अक्षता मूर्ति की 0.89 फीसदी और बेटे रोहन मूर्ति की 1.38% है। कंपनी में मूर्ति परिवार की कुल शेयरहोल्डिंग 3.44 फीसदी हुई। गुरुवार के बंद भाव से मूर्ति का नेटवर्थ 8068 करोड़ रुपए था, जो 1,068 करोड़ रुपए गिरकर 7000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

2014 में बने थे सीईओ
विशाल सिक्का को तीन वर्ष पहले 2014 में इंफोसिस का सीईओ नियुक्त किया गया था। कंपनी की ओर से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक कंपनी ने विशाल सिक्का का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। साथ ही यूबी प्रवीण राव को कंपनी का अंतरिम प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। विशाल सिक्का अब कंपनी में एक्जिक्युटिव वाइस चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। विशाल सिक्का ने इस्तीफा देने के बाद अपने कर्मचारियों को एक खत लिखा। जिसमें उन्होनें कहा कि इंफोसिस में काम करना उनके लिए शानदार रहा। हालांकि इंफोसिस के फाउंडर और बोर्ड के बीच चल रहे विवाद को इस्तीफे की वजह माना जा रहा है। इंफोसिस के सीईओ विशाल शिक्का के कामकाज को लेकर कंपनी के संस्थापकों ने शिकायत दर्ज कराई थी। इन्‍फोसिस के संस्थापक एन नारायणमूर्ति, क्रिस गोपालकृष्णन और नंदन निलेकणी ने निदेशक मंडल से की गई शिकायत में कहा था कि कंपनी के भीतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों का पालन नहीं हो रहा है. नारायणमूर्ति का कहना है कि मनमाने ढंग से अधिकारियों को सुविधाएं दी जा रही हैं. इससे अन्य कर्मचारियों का मनोबल पर बुरा असर पड़ा.

 

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