नोटबंदी पर सरकार का कबूलनामा: 4 लोगों की हुई थी मौत, 8000 करोड़ रुपए का बढ़ा बोझ

दो साल बाद भी नोटबंदी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार ने एक जवाब माना कि नोटबंदी के साल प्रिंटिंग लागत 7,965 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी।

 

By: Prashant Jha

Updated: 19 Dec 2018, 08:05 AM IST

नई दिल्ली: नोटबंदी के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार बैकफुट पर है। पहली बार सरकार ने नोटबंदी से हुए नुकसान को स्वीकारा है। सरकार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस दौरान प्रिंटिंग लागत में बढ़ोतरी और कतार में लगे कुछ लोगों की मौत हुई। दरअसल नवंबर 2016 में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए थे। लेकिन दो साल बाद भी यह एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मंगलवार को राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी पर पूछे गए सवाल पर कहा कि नोटबंदी वाले साल 2016-17 में नोटों की प्रिंटिंग की लागत में इजाफा हुआ था। इस पर 7,965 करोड़ रुपए का अतरिक्त भार आया।

नोटबंदी के साल में बढ़ा था बोझ

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि नोटबंदी के दौरान पुराने नोट बदलने के वक्त एसबीआई के तीन कर्मचारियों और लाइन में लगे एक ग्राहक की मौत हो गई थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्य सभा में दिए एक लिखित जवाब में कहा कि नोटबंदी के साल प्रिंटिंग लागत 7,965 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, लेकिन अगले ही साल 2017-18 में इसमें भारी गिरावट आई और 4,912 करोड़ रुपए रह गई। जवाब में कहा गया है कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की प्रिटिंग पर 3,421 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। नोटबंदी से आरबीआई द्वारा उठाए गए खर्च के संबंध में एक सवाल पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि नोटों को देशभर में भेजने पर 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में क्रमश: 109 करोड़, 147 करोड़ और 115 करोड़ रुपए खर्च हुए।

'चार लोगों की हुई थी मौत'
केंद्र सरकार की ओर से मिले जवाब में कहा गया कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिए बैंकों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मुहैया कराया है और इसमें बैंक की लाइन में एक ग्राहक और बैंक के तीन कर्मचारियों की मौत हुई। वित्त मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिए लाइन में खड़े होने से और काम के दबाव व्यक्तियों और बैंक के कर्मचारियों की मौत हो गई।

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