AIR INDIA को कर्ज सहित बेच दे सरकार, नीति आयोग ने की सिफारिश

घाटे में चल रही विमानन कंपनी एयर इंडिया पर और पैसा लगाना सही नहीं है। इससे बेहतर यह होगा कि सरकार इसे बेच दें। ये कहना है नीति आयोग का।

नई दिल्ली. घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षोत्र की कंपनी एयर इंडिया पर और पैसा लगाना सही नहीं है। इससे बेहतर यह होगा कि सरकार इसे बेच दें। ये कहना है नीति आयोग का। आयोग ने सरकार को सुझ दिया है कि घाटे में चल रही एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की तरफ सरकार को जल्द आगे बढ़ना चाहिए। आयोग ने तर्क दिया है कि इससे सरकारी पैसा बचेगा, जिसे स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों में खर्च किया जा सकता है। बता दें कि एयर इंडिया पिछले काफी समय से लगातार घाटे में जा रही है। कंपनी पर कई बैंकों के भारी कर्ज है। कंपनी सरकारी सहायता के बावजूद घाटे से उबर पाने में नाकाम रही है। 

जेटली ने की थी निजी हाथों में सौपने की वकालत 
इससे पहले केंद्रीय वित मंत्री अरुण जेटली ने भी इस कंपनी को निजी हाथों में सौंपने की वकालत की थी। जेटली का तर्क था  कि जब 86 प्रतिशत विमान परिचालन निजी कंपनियां कर ही रही हैं तो वह 100 प्रतिशत भी कर सकती है। इस कारण इसे निजी हाथों में दिया जा सकता है।

लगभग 60 हजार करोड़ का खर्च
हाल ही में प्रस्तुत की गई नीती आयोग की चौथी रिपोर्ट में एयर इंडिया विनिवेश के लिए एक संभावित रोडमैप का विवरण दिया गया है। इसमें 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के ऋण को भी लेनदार पर डालने का सुछाव दिया गया है। विमानन सूत्रों का कहना है कि एयर इंडिया पर लगभग 60,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें लगभग 21,000 करोड़ रुपए विमान संबंधी ऋण और लगभग 8,000 करोड़ कार्यशील पूंजी शामिल हैं।

 कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला
एयर इंडिया चलेगी, बंद होगी, निजी हाथों में जाएगी या इसका क्या होगा। इस पर अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट को लेना है। सरकार चाहे तो इस रिपोर्ट पर अमल कर भी सकती है या नहीं भी। 
ghanendra singh
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