उद्योग जगत

भविष्य में तेजी से बढ़ेगी बिजली की मांग : ऊर्जा मंत्री

दिल्ली में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन की पहली बैठक होनी है।

Sep 25, 2018 / 06:19 pm

Manoj Kumar

भविष्य में तेजी से बढ़ेगी बिजली की मांग : ऊर्जा मंत्री

नई दिल्ली। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने मंगलवार को कहा कि देश में अभी बिजली की मांग 6.5 फीसदी की दर से बढ़ रही है और भविष्य में मांग में तेजी आने की उम्मीद है। सिंह ने यह बात 02 अक्टूबर से दिल्ली और ग्रेटर नोएडा में आयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन की पहली बैठक, नवीकरणीय ऊर्जा निवेश पर दूसरे सम्मेलन और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों की दूसरी बैठक की संवाददाताओं के जानकारी देने के दौरान कही। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 02 अक्टूबर को विज्ञान भवन में तीनों बैठकों तथा सम्मेलनों का एक साथ उद्घाटन करेंगे। तीनों कार्यक्रमों में 3,500 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें 50 प्लेनरी एवं तकनीकी सत्र होंगे। सौ से ज्यादा कंपनियां ग्रेटर नोएडा में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा में ज्यादा निवेश करने की जरूरत

मंत्री ने कहा कि देश में इस समय बिजली की मांग 6.5 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रही है। जैसे-जैसे हम हर घर में बिजली पहुंचाने और सबको चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, बिजली की मांग भी ज्यादा रफ्तार से बढ़ेगी। अर्थव्यवस्था में आ रही तेजी से प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग बढ़ेगी और इससे भी मांग में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि बिजली की मांग बढ़ने के कारण हमें नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा में ज्यादा निवेश करने की जरूरत होगी। इस क्षेत्र में हम दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में भारत अभी पांचवें स्थान पर है। हमारी मौजूदा क्षमता 71.85 गीगावाट हो गई है, जिसे 2022 तक बढ़ाकर 175 गीगावाट पर पहुंचाने का लक्ष्य है। सौर ऊर्जा में हम दुनिया में पांचवें और पवन ऊर्जा में चौथे स्थान पर हैं।
68 देशों ने दी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को मंजूरी

सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिए संभावित 121 देशों में से अब तक 68 ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिनमें 44 देशों में समझौते को आंतरिक मंजूरी भी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है क्योंकि इस गठबंधन की स्थापना भारत की पहल पर हुई है। भारत ने इसकी स्थापना के लिए 175 करोड़ रुपए देने का वादा किया था जिसमें से 140 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सौर गठबंधन का जल्द ही विस्तार किया जाएगा। लगभग सभी अफ्रीकी देश इसका सदस्य बनने की इच्छा दिखा रहे हैं। वे चाहते हैं कि भारतीय विशेषज्ञ उनके यहां सौर ऊर्जा संयंत्रों के विकास में मदद दें। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव आनंद कुमार ने बताया कि देश में सौर ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है और संभव है कि 2022 तक हम 175 गीगावाट के लक्ष्य से ज्यादा क्षमता स्थापित कर लेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों कार्यक्रमों का लक्ष्य दुनिया को एक मंच पर लाकर नवीकरणीय ऊर्जा के बारे में चर्चा करना है।

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