कॉम्पिटिशन को मानें अपने लिए बेहतर ऑप अपॉच्र्यूर्निटी

कॉम्पिटिशन को मानें अपने लिए बेहतर ऑप अपॉच्र्यूर्निटी

एंटरप्रेन्योर के लिए बिजनेस वर्ल्ड Business world में सबसे बड़ा चैलेंज है वहां मौजूद कॉम्पिटिशन। विशेषकर ग्रोथ वाले सेक्टर से यदि आप बिजनेस की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपकी सफलता का प्रतिशत कितना होगा इसकी कैलकुलेशन को लेकर सवाल उठते आए हैं।

एक्सपर्ट एडवाइज से स्टार्टअप के लिए राह होती आसान
बिजनेस एक्सपर्ट और स्मॉल बिजनेस स्ट्रेटजी को लेकर हाल ही में आए सर्वे में सामने आया है। यदि कॉम्पिटिशन से भरे मार्केट में एक्सपर्ट एडवाइज के साथ उतरा जाए तो एक स्टार्टअप के लिए राह काफी आसान हो सकती है। किसी संबंधित सेक्टर में कॉम्पिटिशन अधिक है इसलिए आप बतौर एंटरप्रेन्योर वहां से शुरुआत ना करें, यह ठीक ऑप्शन नहीं है। मार्केट में एक नहीं अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने टफ कॉम्पिटिशन के बाद भी खासी जगह बनाई है। इसमें बसवे, उबर ईट्स जैसी कंपनियां इस बात का उदाहरण है कि कॉम्पिटिशन से भरे मार्केट में देरी से एंट्री के बाद भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
कॉम्पिटिशन मतलब मौका
इंडिया में सर्विस सेक्टर के स्टार्टअप की संख्या में बीते दो वर्षों में 2800 से अधिक हो गई है। जबकि ई-कॉमर्स स्टार्टअप का नंबर भी तेजी से बढ़ रहा है। ये संकेत है कि जिन सेक्टर में अधिक स्टार्टअप आ रहे है वहां यदि कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है तो उनकी डिमांड भी है। इसलिए कॉम्पिटिशन के डर से अपने पसंदीदा सेक्टर में स्टार्टअप की प्लानिंग से पीछे ना हटे। अपितु स्टार्टअप कंसल्टिंग फर्म या एक्सपर्ट के सहयोग से यह जानने का प्रयास करें कि आप उन्हीं संबंधित सेक्टर में क्या ऐसा कर सकते है जिससे कि आपके बिजनेस को भी सफलता मिले और आपका बिजनेस मिसाल कायम कर सके। इसमें थोड़ा सा डिफरेंट सोच और बैलेंसिंग बजट को ध्यान में रखना कारगर होगा।
कस्टमर्स की संतुष्टि है जरुरी
एक और स्ट्रेटजी strategy जो आपको कॉम्पीटिशन competition वाले मार्केट में जमने का मौका दे सकती है वह है उन कस्टमर डेटाबेस तक पहुंचना जो पहले से मौजूद कंपनियां खुश नहीं है। सर्वे के अनुसार इंडिया में ई-कॉमर्स सेक्टर में कंपनियों की संख्या में तो इजाफा हो रहा है लेकिन करीब 23 फीसदी कस्टमर ऐसे है जो वर्तमान में मौजूद कंपनियों की किसी ना किसी पॉलिसी से खुश नहीं है। चाहे वह फिर रिफंड, प्रोडक्ट या सर्विस क्वालिटी या फिर अन्य कोई पॉलिसी हो। इसलिए एक स्टार्टअप को चाहिए कि वह उस मार्केट में एंट्री से पहले ऐसे कस्टमर को अट्रेक्ट करने के लिए प्लानिंग करें। अन्य कंपनियों से बेहतर सुविधाएं देने का ऑफर भी आपको लोगों के करीब लाता है।
प्राइसिंग की भी वैल्यू
किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस के कस्टमर की कैटेगरी तय होने में प्राइसिंग processing का अहम रोल है। विशेषकर इंडिया जैसी पापुलेटेड कंट्रीज में। बतौर एक एंटरप्रेन्योर आप उस कस्टमर कैटेगरी को चिन्हित करने में कामयाब हो तो प्राइसिंग भी आपको काम्पिटिशन वाले मार्केट में टिके रहने का अच्छा ऑप्शन दे सकती है। कम्पीट करने के लिए आपको कम रेंज वाले प्रोडक्ट या सर्विस की आवश्यकता नहीं है। लो रेंज वाले वाले कस्टमर्स को एक पीरियड के लिए डिस्काउंट देना चाहिए। लॉन्चिंग से पूर्व वैल्यू एडिशन को भी प्रचारित करवाना चाहिए।
नेगेटिव पॉइंट पर काम करें
मार्केट में मौजूद अन्य एंटरप्रेन्योर के प्रोडक्ट या सर्विस का क्या ऐसा नेगेटिव पॉइंट है जिसका आप ऑप्शन बन सकते हैं। इसे समझने का प्रयास करें। सबवे जैसे ब्रांड इसके लिए बेहतरीन उदाहरण है। जब सबवे ने फास्ट फूड बिजनेस में कम्पीट करना प्रारंभ किया तो उनका ऑफर था हैल्दी फास्ट फूड। इसे ना केवल कंपनी ने मार्केटिंग का हिस्सा बनाया अपितु सामान्य फास्ट फूड प्रोडक्ट से अलग एक नए प्रोडक्ट के साथ मार्केट में आए। यकीन मानिए आप जितना नेगेटिव पॉइंट्स पर काम करेंगे आपके प्रोडेक्ट के हिट होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

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