आयकर रिटर्न भरते समय करें सही फॉर्म का इस्तेमाल, वरना लग सकता है जुर्माना

आयकर रिटर्न भरते समय करें सही फॉर्म का इस्तेमाल, वरना लग सकता है जुर्माना

| Publish: Aug, 18 2018 12:14:10 PM (IST) बिजनेस यूटिलिटी न्यूज

वित्त वर्ष 2017-18 का आयकर रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2018 है। एेसे में हम आपको आयकर रिटर्न जमा करने के टिप्स दे रहे हैं।

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म्स की घोषणा कर दी गई है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए ज्यादातर व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त, 2018 है। जिन लोगों की सेलरी 2.5 लाख रुपए से ज्यादा हैं, उनके लिए टैक्स रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है। यह लिमिट वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे अधिक आयु के टैक्सपेयर्स) के लिए 3 लाख रुपए और सुपर सीनियर नागरिकों (80 वर्ष या उससे अधिक आयु के टैक्सपेयर्स) के लिए 5 लाख रुपए है। हमेशा की तरह इस बार भी रिटर्न को सही और सटीक फाइल करना अनिवार्य है। आयकर विभाग के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) बेंगलुरू ने टैक्सपेयर्स के लिए "कॉशनरी एडवाइजरी" (सतर्कता बरतने के लिए परामर्श) जारी कर दी है। यह विशेष रूप से वेतनभोगी वर्ग को आयकर रिटर्न में गलत रिपोर्टिंग के लिए दंडनीय परिणामों की चेतावनी देता है। वैसे, गलत फाइलिंग के लिए जुर्माने के संबंध में कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इस तरह के निर्देश के मद्देनजर यह समझना आवश्यक है कि रिटर्न दाखिल करने के महत्वपूर्ण पहलू क्या हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

समय पर फाइल करें आय का रिटर्न

जैसे कि पहले से ही चर्चा चुकी है, यह सुनिश्चित करें कि यदि आपकी आय 2.5 लाख रुपये की बेसिक थ्रेशोल्ड लिमिट पार करती है तो आप आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर धारा 234-एफ के तहत 10,000 रुपए तक जुर्माना लग सकता है।

फार्म 16 का करें इस्तेमाल

आईटीआर1 को हाल ही वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अधिसूचित किया गया है। इसमें आपकी सेलरी के ब्रेकअप की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह सभी जानकारी देने के लिए आपको अपने फॉर्म16 पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ सकता है। वास्तव में टैक्स फाइलिंग प्लेटफार्मों पर एक विकल्प होता है जहां आप अपना फॉर्म16 अपलोड कर सकते हैं। इससे रिटर्न के उद्देश्य के लिए सभी जरूरी जानकारी फॉर्म 16 से खुद-ब-खुद हासिल हो जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि आपके रिटर्न में कम से कम समय लगे और उसमें न्यूनतम त्रुटियां हो। इसके अलावा आपको यह चिंता नहीं करनी पड़ती कि नियोक्ता का टैन और अन्य जानकारी का सही उल्लेख किया गया है या नहीं क्योंकि वह खुद-ब-खुद भरे जाते हैं।

फॉर्म 26एएस की उपलब्धता

इनकम टैक्स पोर्टल से डाउनलोड करने के लिए एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज है- फॉर्म 26 एएस। यह आपकी रिटर्न फाइलिंग में मदद कर सकता है। इस फॉर्म में आपके आय स्रोतों पर कटौती किए गए टैक्स का ब्योरा शामिल होता है, जिसमें वेतन, ब्याज, पेशेवर रसीद इत्यादि शामिल है। एक तरफ से आप अपने फॉर्म 16 में दिखाई दे रहे टीडीएस को 26एएस के रूप में दिखा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह फ़ॉर्म आपको अन्य आय का विवरण प्राप्त करने में मदद करता है, जिसे आपको अपनी रिटर्न में जाहिर करना चाहिए। इन पर किए गए टीडीएस के क्रेडिट का दावा भी होना चाहिए। हालांकि, ध्यान दें कि बचत खाते से ब्याज पर कोई टीडीएस कटौती नहीं की गई है और इसलिए सुनिश्चित करें कि आप अपनी आय में इस आय का खुलासा करें। भले ही कोई कर देय न हो, क्योंकि आप धारा 80 टीटीए के तहत 10,000 रुपये तक उपलब्ध कटौती का दावा कर रहे हैं। आपको अपने टैक्स रिटर्न को फाइल कर इसका दावा करना होगा।

वापसी में छूट का उचित दावा करना

वित्त वर्ष2017-18 के दौरान हो सकता है कि आपने कर बचाने वाले साधनों में इन्वेस्टमेंट किया हो, जो आपको धारा 80सी के तहत कटौती का दावा करने की अनुमति देता है। सुनिश्चित करें कि आपने निवेश की सीमा तक छूट का दावा किया है। बाद में आयकर अधिकारियों की ओर बुलाए जाने पर ऐसे निवेशों को साबित करने के पुख्ता सबूत आपके पास हैं। यहां यह भी ध्यान दें कि यदि नियोक्ता की ओर फॉर्म16 में आपको दिए जाने वाले लीव ट्रैवल अलाउंस और मेडिकल अलाउंस से संबंधित छूट नहीं दी है तो आप रिटर्न दाखिल करते वक्त उसका दावा नहीं कर सकते हैं।

अपनी सारी आय का खुलासा करें

आप यह सुनिश्चित करें कि फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न में आपने आय के अपने सभी स्रोतों का खुलासा किया है। यदि आप किसी भी व्यवसाय या पेशे से आय प्राप्त करने वाले वेतनभोगी व्यक्ति हैं, तो अपनी रिटर्न फाइल करने के लिए उचित फॉर्म चुनें जैसे- आईटीआर 3 या आईटीआर 4 (यदि आप अनुमानित कर का विकल्प चुनते हैं)। यदि आप आईटीआर1 चुनते हैं और व्यवसाय या पेशे से अपनी आय का खुलासा नहीं करते हैं तो यह कानून का उल्लंघन होगा। इस पर आपको जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि आपको हर आय का खुलासा करना होगा, भले ही उस पर आपको छूट मिल रही हो। कैपिटल गेन्स में भी कोई भी व्यक्ति रिटर्न फाइल करते वक्त ही इसका खुलासा कर सकता है और इस पर क्लेम कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि आप संपत्ति बेच रहे हैं और उस लाभ को पूरी तरह नई संपत्ति पर खर्च कर रहे हैं तो इस लेन-देन का पूरा ब्योरा रिटर्न में दाखिल करें। यह आपको प्रॉपर्टी की बिक्री पर मिलने वाली राशि में से काटी गई टीडीएस को रिफंड हासिल करने में भी मदद करेगा।

सही बैंक खाते का विवरण प्रस्तुत करें

यह आवश्यक है कि आप आईएफएससी कोड, बैंक का नाम, बैंक खाता संख्या इत्यादि सटीक बैंक खाता विवरण प्रस्तुत करें ताकि आप तुरंत अपने रिफंड हासिल कर सकें। अब आईटीआर फॉर्म गैर-निवासियों को भारत के बाहर बैंक खाते का ब्योरा देने की इजाजत देता है, जो बैंक का आईबीएएन या स्विफ्ट कोड है, ताकि उन्हें सीधे रिफंड मिल सके।

(क्लीयरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता से बातचीत के आधार पर)

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