एक्सप्रेस वे पर नहीं चल सकेगी 35 किमी माइलेज वाली बजाज की ये कार, जानें क्या है वजह

एक्सप्रेस वे पर नहीं चल सकेगी 35 किमी माइलेज वाली बजाज की ये कार, जानें क्या है वजह

Pragati Vajpai | Publish: Jul, 21 2018 02:32:30 PM (IST) कार

6 अप्रैल 2018 को नोटिफाई किए गए 'मैक्सिमम स्‍पीड ऑफ मोटर व्‍हीकल' में quadricycle कैटगरी को भी शामिल किया गया है। इसमें स्‍पष्‍ट तौर पर

नई दिल्ली: बजाज कंपनी ने जब से क्यूट की घोषणा की है लगातार इस कार के रास्ते में मुसीबतें आ रही हैं। कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद फाइनली कंपनी ने इसकी लॉन्चिंग की तैयारी शुरू कर दी थी, तो अब एक नई खबर आ रही है कि ये गाड़ी एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चल पाएगी।

इस वजह से नहीं चलेगी एक्सप्रेस वे पर- मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट द्वारा 6 अप्रैल 2018 को नोटिफाई किए गए 'मैक्सिमम स्‍पीड ऑफ मोटर व्‍हीकल' में quadricycle कैटगरी को भी शामिल किया गया है। जिसमें अलग-अलग सड़कों पर quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल की मैक्सिमम स्‍पीड लिमिट भी तय की गई है। इसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चल पाएंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Qute देश की Quadricycle कैटगरी की यह पहली गाड़ी है।

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क्‍या हैं quadricycle के नए नियम

मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि quadricycle कैटगरी के व्‍हीकल एक्‍सप्रेस-वे पर नहीं चलेंगे, जबकि 4 लेन या उससे अधिक लेन वाले हाईवे पर ये व्‍हीकल 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक स्‍पीड पर नहीं चल पाएंगे। शहरों के अंदर इन व्‍हीकलस की मैक्सिमम स्‍पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इससे अधिक स्‍पीड होने पर इनके खिलाफ ओवर स्‍पीड की कार्रवाई कर सकती है।

आपको बता दें कि भारत में Quadricycle को मंजूरी नहीं होने के कारण यह मार्केट में नहीं उतर सकी थी।जून 2018 में केंद्र सरकार ने Quadricycleकैटगिरी की घोषणा की है।जिसके बाद इस कार के भारतच में लॉन्चिंग का रास्ता साफ हुआ है।

इकोफ्रेंडली कार होने का है दावा-

कंपनी का दावा है कि‍ बाजार में मौजूद कि‍सी भी कार से यह 37 फीसदी हल्‍की है। हल्‍की होने की वजह से ईंधन बचाती है। यह शहरों की सड़कों को ध्‍यान में रखकर बनाई गई है। इस गाड़ी की खासियत ये है कि ये कम जगह लेती है और आसानी से मुड़ जाती है। ये कार अन्य छोटी कारों के मुकबले 37 फीसदी कम कार्बन का उत्‍सर्जन करती है। यह एक कि‍लोमीटर पर केवल 66 ग्राम CO2 छोड़ती है।

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