scriptMaruti Alto to Eeco sales Stop May Company Exit Small Car Segment | Maruti बंद कर सकती है Alto और Celerio जैसी छोटी कारों की बिक्री, जानिए क्या है वजह | Patrika News

Maruti बंद कर सकती है Alto और Celerio जैसी छोटी कारों की बिक्री, जानिए क्या है वजह

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने कहा कि एंट्री-लेवल कारों की लागत में 4 एयरबैग को शामिल करने के लिए डिज़ाइन में संशोधनों के बाद वृद्धि होगी, जिससे एंट्री लेवल कारों की बिक्री पर बुरा असर पड़ेगा।

नई दिल्ली

Published: June 28, 2022 02:44:11 pm

भारत सरकार देश में बेचे जाने वाले वाहनों में सेफ़्टी फीचर्स को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयासरत है। हाल ही में केंद्र सरकार ने आगामी 1 अक्टूबर 2022 से देश में सभी पैसेंजर वाहनों में 6 एयरबैग को अनिवार्य करने का नया नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी बल्कि सड़क हादसों में होने वाले हताहतों की संख्या पर भी अंकुश लग सकेगा। लेकिन देश की कुछ वाहन निर्माता कंपनियां सरकार के इस फैसले से नाखुश दिख रही हैं।

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Maruti बंद कर सकती है Alto और Celerio जैसी छोटी कारों की बिक्री

बीते दिनों सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (MoRTH) नितिन गडकरी ने घोषणा की थी कि, उन्होंने भारत NCAP या न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम के लिए GSR (सामान्य वैधानिक नियम) अधिसूचना के मसौदे को मंजूरी दे दी है। दुनिया भर में अन्य कार क्रैश रिपोर्ट की ही तरह Bharat NCAP क्रैश टेस्ट में वाहनों प्रदर्शन के आधार पर कारों को स्टार रेटिंग दिया जाएगा। इससे देश में बेचे जाने वाले वाहनों को स्टार रेटिंग मिलेगी, जिससे ग्राहक यह समझ सकेंगे कि उक्त वाहन एक्सीडेंट या क्रैश के वक्त किस हद तक सुरक्षित है।

Maruti Suzuki को सरकार के फैसले से ऐतराज़:

केंद्र सरकार अपने इन दोनों नियमों से वाहनों में यात्रियों की सेफ़्टी को बेहतर करने की तैयारी कर रही है। लेकिन देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने इन दोनों फैसलों पर आपत्ती जताई है। मारुति सुजुकी का कहना है कि 6 एयरबैग को वाहनों में अनिवार्य करने के अपने फैसले पर सरकार को पुन: विचार करने की जरूरत है। इससे छोटी कारों का भविष्य लगभग खत्म हो जाएगा। इसके पीछे मारुति सुजुकी ने तर्क दिया है कि, छोटी और सस्ती कारों में 6 एयरबैग शामिल करने पर इनकी कीमत में इजाफा होगा और पहले से ही ये सेग्मेंट बिक्री की मार झेल रहा है और उंची कीमत इसे और भी प्रभावित करेगी।

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वहीं दूसरी ओर मारुति सुजुकी ने देश में बिकने वाली सभी कारों के लिए Bharat NCAP मानदंडों को अनिवार्य बनाने का विरोध किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा भारत एनसीएपी (या न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम) रेफ़्टी रेटिंग कार्यक्रम को मंजूरी देने के कुछ घंटों बाद ही - मारुति सुजुकी के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा कि, "Bharat NCAP देश में बेचे जाने वाले सभी कारों के लिए अनिवार्य नहीं होना चाहिए, भारत यूरोपीय बाजार से अलग है। हम यूरोप के रोड सेफ़्टी गाइडलाइंस का पालन नहीं कर सकते हैं, हमें यह देखना चाहिए कि दोपहिया चालकों के लिए बेहतर परिवहन प्रदान करने के लिए क्या किया जा सकता है।"

बंद हो जाएगी Alto जैसी कारों की बिक्री:

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने कहा कि एंट्री-लेवल कारों की लागत में 4 एयरबैग को शामिल करने के लिए डिज़ाइन में संशोधनों के बाद वृद्धि होगी, जो कि कंपनी के लिए आर्थिक रूप से अव्यावहारिक होगा, क्योंकि यह बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। इसलिए कंपनी छोटी कारों के बाजार से बाहर निकलने में संकोच नहीं करेगी, यानी ऐसा संभव है कि कंपनी अपनी छोटी कारों जैसे ऑल्टो 800, सेलेरियो, एस-प्रेसो और इको जैसे मॉडलों का प्रोडक्शन और बिक्री बंद कर दे।

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क्या कहते हैं नितिन गडकरी:

वहीं इस मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, नितिन गडकरी ने कुछ निर्माताओं के विरोध को ठीक नहीं माना है। उनका मानना है कि 6 एयरबैग और अनिवार्य Bharat NCAP रेटिंग का विरोध करना दोहरी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा, कुछ कार निर्माता निर्यात-विशिष्ट कारों में टॉप सेफ़्टी फीचर्स और 6 एयरबैग की पेशकश करते हैं, लेकिन भारत में बेची जाने वाली कारों में वो इन फीचर्स और मानकों को शामिल नहीं करते हैं। दरअसल, गडकरी भारत में बेची जाने वाली कारों के लिए वही सेफ्टी फीचर्स चाहते हैं जो एक्सपोर्ट-स्पेक कारों यानी विदेशों में निर्यात किए जाने वाले वाहनों में दिया जाता है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री ने संसद में बताया था कि अगर 2020 में सभी कारों में 6 एयरबैग होते तो तकरीबन 13,000 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

वाहन निर्माताओं के अलावा, ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) ने भी मंत्रालय को लिखा है कि वे एयरबैग की अतिरिक्त मांग को पूरा कर सकते हैं, लेकिन स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने के लिए इसे 12-18 महीने की समय सीमा की आवश्यकता होगी। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने मंत्रालय से इस 6 एयरबैग रेगुलेशन की "समीक्षा और पुनर्विचार" करने के लिए कहा है, जिसमें कहा गया है कि "साइड और कर्टन एयरबैग दुनिया में कहीं भी अनिवार्य नहीं हैं"।


क्या है मौजूदा नियम:

आज की तारीख में, भारत में सभी कारों में डुअल एयरबैग (2 Airbags) को बतौर स्टैंडर्ड शामिल करने का नियम है, जो कि कुछ साल पहले सरकार द्वारा पारित आदेश के अनुसार है। इसमें एक एयरबैग चालक और दूसरा को-ड्राइवर यानी फ्रंट सीट पर बैठे सहयात्री के लिए होता है। भारत में ऐसी कारें हैं जो 6 एयरबैग के साथ आती हैं, लेकिन अभी इसे अनिवार्य नहीं किया गया है, जिससे इस फीचर को वाहन निर्माता कंपनियों अपने वाहनों के टॉप मॉडलों इत्यादि में शामिल करती हैं।

अब नए नियम के साथ, भारत सरकार अक्टूबर 2022 से भारत में सभी कारों के लिए 6 एयरबैग अनिवार्य कर रही है। यह न केवल कारों को और अधिक महंगा बना देगा बल्कि विशेष रूप से छोटे वाहनों का निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें भी बढ़ाएगा।

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6 Airbags से कितनी बढ़ सकती है कारों की कीमत:

फिलहाल कारों में 2 एयरबैग दिए जा रहे हैं और नए नियम के अनुसार जब इनमें 4 और एयरबैग को शामिल किया जाएगा तो इससे कारों की कीमत में इजाफा होना लाजमी है। अतिरिक्त एयरबैग जोड़ने की व्यवहार्यता अध्ययन करते हुए, मारुति का कहना है कि इसके एंट्री लेवल मॉडलों की लागत में 60,000 रुपये तक की वृद्धि देखी जा सकती है क्योंकि इसके लिए डिजाइन में कुछ संरचनात्मक परिवर्तनों की आवश्यकता होगी। हालांकि ये कॉस्टिंग अलग-अलग मॉडलों के लिए भिन्न हो सकती है, क्योंकि ये वाहनों के डिज़ाइन और किए जाने वाले परिवर्तन पर निर्भर करता है।

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