मप्र के स्कूलों में स्काउट-गाइड टीम अनिवार्य

मप्र के स्कूलों में स्काउट-गाइड टीम अनिवार्य
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आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, राज्य प्रशासन ने स्काउट-गाइड के क्रिया-कलापों को शिक्षा का अभिन्न अंग मानते हुए सभी विद्यालयों में स्काउट गाइड दलों का गठन एवं संचालन अनिवार्य कर दिया है

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेश के सभी स्कूलों में स्काउट-गाइड टीमों का गठन और संचालन अनिवार्य कर दिया है। इस समय प्रदेश के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के करीब छह लाख 50 हजार विद्यार्थी इसके सदस्य हैं। सोमवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, राज्य प्रशासन ने स्काउट-गाइड के क्रिया-कलापों को शिक्षा का अभिन्न अंग मानते हुए सभी विद्यालयों में स्काउट गाइड दलों का गठन एवं संचालन अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा तीसरी से 12वीं तक के छात्रों को उनकी उम्र के अनुरूप निर्धारित पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि स्काउट एंड गाइड का मुख्य उद्देश्य छात्रों को दी जा रही शिक्षा में सहयोग देते हुए उनका शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास करना है। राज्य में स्काउट-गाइड के सदस्य विभिन्न कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। पौधरोपण, पल्स पोलियो टीकाकरण, जन-जागरण रैलियों में स्काउट-गाइड के सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वर्ष 2016 में उज्जैन में हुए सिंहस्थ में स्काउट एंड गाइड के सदस्यों ने व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया था।

तय सीमा से ज्यादा है अहमदाबाद के 150 निजी स्कूलों की फीस !
अहमदाबाद। शहर, ग्राम्य और जिले के 17 सौ निजी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में से करीब 150 स्कूल ही ऐसे हैं, जिनकी फीस सरकार की ओर से निर्धारित की गई 15, 25 और 27 हजार रुपए की वार्षिक फीस सीमा से ज्यादा है।

यानि करीब 8.8 प्रतिशत स्कूलों की फीस तय से ज्यादा है, जबकि 1550 स्कूल यानि 91.18 प्रतिशत स्कूल इससे कम फीस ही वसूल कर रहे हैं। जिनकी फीस तय सीमा से ज्यादा है उन्हें अपनी फीस को फीस निर्धारण समिति से स्वीकृत कराना अनिवार्य है। इसमें शहर की करीब 64, जिले की 50 और ग्राम्य इलाके की 35 स्कूलें शामिल हैं।

अहमदाबाद शहर जिला शिक्षाधिकारी एन.एम.मेहता ने बताया कि शहर में 800 स्कूलों में से करीब 64 निजी स्कूल ही ऐसी हैं जिन्हें अपनी फीस निर्धारित कराने के लिए फीस समिति के समक्ष जाना पड़ेगा। क्योंकि उनकी फीस सरकार की ओर से निर्धारित प्राइमरी में 15 हजार, माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक में 25 और उच्चतर माध्यमिक विज्ञान संकाय में 27 हजार वार्षिक फीस की सीमा से ज्यादा है। जिससे इन्हें अपनी फीस को फीस समिति से मान्य कराना होगा। जिनकी कम फीस है वह स्कूल भी चाहें तो अपनी फीस बढ़ाने के लिए समिति के समक्ष प्रस्ताव कर सकते हैं।

अहमदाबाद ग्राम्य डीईओ एच.एच.राज्यगुरू ने बताया कि ग्राम्य क्षेत्र की 292 स्कूलों में से करीब 35 स्कूलों की फीस ही निर्धारित सीमा से ज्यादा है। जिला प्राथमिक शिक्षाधिकारी (डीपीईओ) महेश महेता ने बताया कि जिले में 648 स्कूलों में से 50 स्कूलों की फीस तय सीमा से ज्यादा है। इन्हें तो फीस समिति के पास जाना जरूरी ही है। शेष निजी स्कूल भी अपनी फीस को बढ़ाने के लिए समिति के समक्ष जा सकते हैं।

सोमवार से स्वीकार  होंगे आवेदन

सोमवार से लेकर 15 जून तक स्कूल संचालक वस्त्रापुर स्थित शहर, ग्राम्य डीईओ कार्यालय में फीस बढ़ाने के लिए अपने फॉर्म को जमा करा सकते हैं। इसके लिए इन कार्यालयों में विशेष सेल बनाया गया है। मार्गदर्शन व मदद के लिए भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जिले के निजी स्कूल संचालक वस्त्रापुर ग्राम्य डीईओ कार्यालय में भी अपनी फाइल जमा करा सकते हैं। इसके अलावा भद्र में जिला पंचायत भवन स्थित डीईपीओ कार्यालय में भी फाइल को जमा करा सकते हैं।

जून-17 से शुरू हो रहीं नई स्कूलों को भी मंजूरी जरूरी

अहमदाबाद.जोशी ने कहा कि जो निजी प्राइमरी, हाईस्कूल या इंटर स्कूल जून-2017 से शुरू हो रहे हैं उन्हें भी अपनीफीस को फीस समिति से स्वीकृत कराने के बाद ही फीस लेनी हो। तब तक सरकार की निर्धारित सीमा के हिसाब से ही फीस लेनी होगी।

सत्र-जून से और वित्त वर्ष अप्रेल से किसके तहत दें हिसाब

एक संचालक ने कहा कि शैक्षणिक सत्र और वर्ष जून महीने से शुरू होता है, जबकि वित्त वर्ष अप्रेल से। ऐसे में फीस और वित्तीय ब्यौरा किसे आधार में रखते हुए फॉर्म में भरा जाए। अधिकारियों ने जवाब दिया कि खर्च का ब्यौरा ऑडिट नियमों के तहत वित्त वर्ष के तहत ही दिया जाए।

सीबीएसई, इंटरनेशनल बोर्ड स्कूल संचालक रहे गायब


अहमदाबाद. शहर के बड़े सीबीएसई, इंटरनेशनल बोर्ड, आईसीएसई, आईएसई बोर्ड से संबद्धता प्राप्त निजी स्कूलों के संचालक इस बैठक में नहीं पहुंचे। अधिकारियों को कहना है कि उनकी ओर से जागरुकता बैठक के संदर्भ में सभी बोर्ड के सभी निजी स्कूलों के संचालकों आमंत्रित किया गया था। बड़ी संख्या में स्कूलों के संचालक आए भी थे।

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