तेंदुए की दहशत से लोगों ने छोड़ा गांव, आदमखोर को पकड़ने दुधवा टाइगर रिजर्व से पहुंची टीम

दिन भर चली तेंदुए को पकड़ने की कवायद, जेसीबी से हटायी गयीं झाड़ियां, चारों ओर लगाया गया जाल।

चंदौली . यूपी के चंदौली जिले में नक्सल प्रभावित नौगढ़ तहसील के जयमोहिनी रेंज अर्न्तत कंपार्टमेंट नंबर 11 के धौठवां जंगल में तेंदुए की दहाड़ से गांव के लोग दहशत के चलते गांव खालीकर भाग गए हैं। आदमखोर तेंदुए को पकड़ने में वन विभाग के पसीने छूट गए हैं, जिसके बाद पीलीभीत से उसे पकड़ने के लिये दुधवा टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई जो गुरुवार को पहुंच गयी। टीम ने जाल लगा दिया और तैयारी कर ली पर शाम तक बाघ को नहीं पकड़ा जा सका था। जंगल में आदमखोर के होने की खबर से स्थानीय गांव के लोग दहशत में हैं। पुलिस की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है, रात में गश्त बढ़ा दिया गया था और लोग भी पहरा दे रहे थे।

 

गुरुवार को वन विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर धौठवां गांव के नजदीक जंगल में पहुंची, जहां बाघ है। तेंदुआ घनी झाड़ियों में बैठा है और उसे लम्बे बांस के जरिये खाना और बड़े से लोहे के बर्तन में पानी दिया जा रहा है। गुरुवार को दुधवा टाइगर रिजर्व से डॉ. दक्ष, डॉ. अखिलेश और समाजशास्त्री ओपी मिश्र की टीम चंदौली पहुंची और वहां से सीधे मौके पर जंगल पहुंच गयी। सुबह से लेकर दोपहर तक डीएफओ मनोज खरे और दुधवा से आई टीम इस बात पर मंथन करता रहा कि तेंदुआ को जाल डालकर पकड़ना है या फिर उसे ट्रांक्युलाइज (एक प्रकार का बेहोश करने का इंजेक्शन) करना है।

 

इस बीच तेंदुआ पकड़ने के ऑपरेशन का पता लगने के बाद स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गयी। तेंदुआ को पकड़ने के लिये वन विभाग की टीम ने उसके चारों ओर से जेसीबी के जरिये झाड़ियां हटायीं और जाल भी लगा दिया गया ताकि किसी तरह की कोई चूक न होने पाए। बताया गया है कि तेंदुआ को शायद पिछले हिस्से में चोट लगी है, कयोंकि वह सिर्फ आगे का पैर और गर्दन ही हिला रहा है। जिस जगह जंगल में तेंदुआ है वहां से सड़क महज 100 मीटर दूर है और अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसे शायद किसी वाहन से चोट लग गयी होगी, जिससे वह घायल हुआ हो। तेंदुआ रविवार की शाम को देखा गया, जिसके बाद इलाके में दहशत फैल गयी। हालांकि अभी तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचा है, बावजूद इसके लोग गांव खाली कर चले गए हैं। डीएफओ का दावा है कि गुरुवार को तेंदुआ पकड़ जाएगा, जिसके बाद उसे इलाज के लिये लखनऊ या कानपुर चिड़ियाघर ले जाया जाएगा।

By Santosh jaiswal

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रफतउद्दीन फरीद
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