चंदौली. योगी सरकार आने के बाद अखिलेश यादव सरकार की अधूरी पड़ी योजनाओं को लेकर राजनीती चरम पर है। समाजवादी पार्टी के नेता कहते नहीं थकते कि वर्तमान सरकार जो कुछ बता रही है वह सब अखिलेश यादव सरकार की योजनाएं हैं। दूसरी ओर भाजपा सरकार और उनके विधायक यह कहते नहीं थकते कि अखिलेश राज में विकास के नाम पर मूर्ख बनाने के अलावा कुछ नहीं किया गया। चंदौली में तो ये राजनीति काफी आगे बढ़ चुकी है। यहां एक मेडिकल कॉलेज को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है।

 

मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास लखनऊ से किया था, और सपाइयों का दावा है कि जमीन तय कर इसके लिये पहली किस्त भी रिलीज कर दी गयी थी। पर अब योगी सरकार इसके फिर से जमीन तलाश रही है। भाजपा के विधायक लगातार जल्द जमीन तलाश लिये जाने की बात कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी इसको लेकर आर-पार की लड़ाई का मूड बना रही है। मेडिकल कॉलेज के मामले को लेकर पूर्व सपा विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू ने बाकायदा एक महापंचायत का ऐलान कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि इसमें सभी दलों और क्षेत्र के सभी गांवों के लोगों को बुलाया जाएगा। यह महापंचायत आने वाली 25 फरवरी को उसी माधोपुर गांव में होगी, जहां मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया गया था। इतना ही नहीं इसको लेकर मनोज सिंह डब्ल्यू हाईकोर्ट तक जाने की बात कह रहे हैं।


मेडिकल कॉलेज संघर्ष समिति का गठन
पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू की ओर से बुलायी जाने वाली महापंचायत के लिये बड़ी तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिये मेडिकल कॉलेज संघर्ष समिति का गठन किया गया है। इसका मकसद 25 फरवरी को होने वाली महापंचायत के लिये जनसमर्थन जुटाना है। समिति ने क्षेत्र के गांवों और स्कूल कॉलेज में जाकर छात्रों व लोगों को महापंचायत का मकसद समझाकर उन्हें इसमें आने के लिये बुलाना शुरू कर दिया है। समिति के अध्यक्ष अंजनी सिंह कहते हैं कि मेडिकल कॉलेज को लेकर एक भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। हमारा मकसद लोगों को इसके पीछे की सच्चाई से रूबरू कराना है, क्योंकि पिछली सरकार में जमीन की रजिस्ट्री हो चुकी थी और वर्तमान में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार बयान दे रहे हैं कि इसके लिये जमीन देखी जा रही है। समिति कुल 10 लोगों की टीम है और उनके अपने लोग भी।


मेडिकल कॉलेज के लिये ले ली गयी थी उद्यान विभाग की 32 एकड़ जमीन!
विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू दावा करते हैं कि हमारी सरकार ने वर्तमान सरकार के लिये बिल्कुल आसान काम छोड़ा था। तकरीबन 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेडिकल कॉलेज के लिये जमीन तय थी। सैयदराजा के माधेपुर डबरिया गांव के बीच उद्यान विभाग की 32 एकड़ जमीन को कैबिनेट की बैठक में फैसला कर उसे मेडिकल कॉलेज के नाम करा दिया गया। बाकायदा खसरा-खतौनी में नाम दर्ज किया गया। बावजूद इसके भाजपा सरकार यह भ्रम फैला रही है कि मेडिकल कॉलेज के लिये जमीन देखी जा रही है। डब्ल्यू के मुताबिक यूपी विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से ही इसका शिलान्यास किया था और इसके लिये साढ़े पांच करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी थी। जमीन पर लोड शेडिंग कर इसकी पूरी जांच कर इसे ओके कर दिया गया था।


वापस उद्यान विभाग को दी गयी जमीन तो जाएंगे हाईकोर्ट
पूर्व विधायक डब्ल्यू ने दावा किया है कि सरकार मेडिकल कॉलेज के लिये दी गयी जमीन को उद्यान विभाग को वापस करने जा रही है। पर हम ऐसा नहीं होने देंगे। जमीन को ऐसे ही वापस नहीं किया जा सकता। मैंने एसडीएम से साफ कह दिया है कि जमीन कैबिनेट की बैठक में फैसले के बाद ली गयी थी और इसे ऐसे ही वापस नहीं किया जा सकता। कैबिनेट में ही इसका फैसला होना चाहिये। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि फिर भी सरकार ने ऐसा करने की कोशिश की तो इसके लिये वह हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।


विकास नहीं वर्चस्व की है लड़ाई
मेडिकल कॉलेज के नाम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की यह लड़ाई असल में राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई है। जहां विपक्ष में बैठी समाजवादी पार्टी इसके जरिये सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों को घेरना चाहते हैं वहीं सत्ता पक्ष शायद यह चाहता है कि इसका लाभ विपक्ष को न मिले। कुल मिलाकर जिस तरह से चंदौली के दो गांवों के बीच मामूली बात को लेकर हुई मारपीट के बाद समाजवादी पार्टी फ्रंट पर आ गयी और अब मेडिकल कॉलेज के लिये महापंचायत का ऐलान, साफ जाहिर है कि इस राजनैतिक लड़ाई की पटकथा 2019 को देखते हुए लिखी जा रही है।

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