चंडीगढ़ में एक अप्रैल से रात भर मिलेगी शराब, Cow Cess भी लगेगा

सभी रेस्टोरेन्ट्स और बार के लिए अल्कोहल मीटर लगाना अनिवार्य

By: Bhanu Pratap

Published: 07 Mar 2020, 06:21 PM IST

चंडीगढ़। ये केन्द्र शासित प्रदेश है जनाब। यहां शराब की सर्वाधिक खपत होती है। इतना ही नहीं, शराब के दाम बढ़ने से किसी पर कोई फर्क नहीं बढ़ता है। शराब से चंडीगढ़ प्रशासन को सर्वाधिक राजस्व मिलता है। तभी तो चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2020-21 की एक्साइज पॉलिसी जारी कर दी है, जिसके तहत काउ सेस (गाय उपकर) भी लगाया जाएगा। इसके चलते शराब की दरें 10-15 फीसदी बढ़ जाएंगी। इस बार प्रशासन ने ठेकों की संख्या भी बढ़ाकर 92 से 95 कर दी है। नई शराब नीति से राजस्व 617 करोड़ रुपये से बढ़कर 680 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वी.पी. सिंह बदनौर ने नई शराब नीति को मंजूरी दे दी है।

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राउंड द क्लॉक शराब परोसने की अनुमति

नई नीति एक अप्रैल, 2020 से लागू होगी। गाय उपकर को पंजाब निषेध अधिनियम, 1955 के तहत उपकर को अधिसूचित किया जा रहा है, जिसमें सार्वजनिक आपत्ति मांगने का कोई प्रावधान नहीं है। इंडियन मेड फॉरेन लिकर पर हाई एंड ब्रांड्स को छोड़कर एक्साइज ड्यूटी 10 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फाइव स्टार और उससे ऊपर दर्जे के होटल में राउंड द क्लॉक शराब परोसने की अनुमति दी गई है। इनकी लाइसेंस फीस 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपए करने का फैसला लिया गया है। इनके कमरों में मिनी बार की अनुमति भी होगी। मतलब होटल के कमरे में बैठकर शराब का सेवन किया जा सकता है।

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नहीं बढ़ाई लाइसेंस फीस

इसके साथ ही कम अल्कोहलिक ड्रिंक्स जैसे बीयर, वाइन आदि को प्रोमोट करने और इंडियन वाइन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए लाइसेस फीस को बढ़ाया नहीं गया है। इसे पूरे साल के लिए 12 हजार रुपए ही तय किया गया है। वाइन की लेवल रजिस्ट्रेशन फीस को 10 हजार प्रति ब्रांड से घटाकर 7500 प्रति ब्रांड कर दिया है। साथ ही सॉफ्ट लिकर को बढ़ावा देने के लिए इसकी एक्साइज ड्यूटी को भी रुपए 30 पी.बी.एल. ही रखा गया है, ताकि लोगों को हार्ड से सॉफ्ट लिकर में शिफ्ट किया जा सके। इसके अलावा पिछले साल के मुकाबले इसके लिए लाइसेस फीस को भी बढ़ाया नहीं गया है।

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दरों में बदलाव नहीं

रेस्टोरेन्ट्स, पब्स और बार के लिए भी पिछले साल के मुकाबले रेट में बदलाव नहीं किया गया है। जी.एस.टी. एक्ट के अंडर रजिस्टर्ड शॉप्स को इम्पोर्टेड वाइन, इंडियन वाइन और इम्पोर्टेड बीयर के लिए तय लाइसेस एल-2डी के तहत लाइसेंस फीस 2 लाख रुपए ही रखी गई है। प्रशासन ने दावा किया है कि नई एक्साइज पॉलिसी सिटीजन, कंज्यूमर्स, मैन्यूफेक्चरर्स, होलसेल्स और गवर्नमेंट की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

ऑनलाइन आवंटन

ठेकों के आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए ई-टेंडरिंग को माध्यम बनया गया है। परमिट और पास भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। लिकर सर्व करने वाले सभी रेस्टोरेन्ट्स और बार के लिए अल्कोहल मीटर लगाने अनिवार्य होंगे, ताकि लोग शराब का सेवन करने के दौरान अल्कोहल लेवल का असेस्मैंट कर सकें। स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए सभी लाइसेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपनी शॉप्स के पास सफाई व्यवस्था बनाकर रखें। ऐसा न करने पर विभाग द्वारा पैनल्टी लगाई जाएगी।

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