सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नवजोत सिद्धू को राहत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नवजोत सिद्धू को राहत

Shankar Sharma | Publish: May, 17 2018 10:04:06 PM (IST) Chandigarh, Punjab, India

सुप्रीम कोर्ट नेकरीब तीस साल पुराने एक मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को महज एक हजार रुपए जुर्माना लगाकर बरी कर दिया।

चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोडरेज के मामले में पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को बरी किए जाने के बाद सिद्धू दंपति ने जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है वहीं इस फैसले के बाद सिद्धू की विरोधी राजनीतिक दलों तथा कांग्रेसियों द्वारा की जा रही घेराबंदी समाप्त होगी।


सुप्रीम कोर्ट ने आज करीब तीस साल पुराने एक मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को महज एक हजार रुपए जुर्माना लगाकर बरी कर दिया। अदालत ने सिद्धू को मारपीट के मामले में तो दोषी करार दिया लेकिन गैर इरादतन हत्या के मामले में बरी कर दिया। यह मामला नवजोत सिंह सिद्धू के लिए लंबे समय से गले की फांस बना हुआ था। पंजाब की पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने हाईकोर्ट में एक स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू पर उंगली उठाई थी। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब की वर्तमान सरकार ने पूर्व सरकार के समय की स्टेट्स रिपोर्ट को ही दाखिल किया था। जिसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू की घेराबंदी बढ़ गई थी।


एक तरफ अकाली-भाजपा व आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा नवजोत ङ्क्षसह सिद्धू को इस मुद्दे पर घेरते हुए मंत्री पद से इस्तीफे की मांग की जा रही थी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी में भी एक बड़ा गुट सिद्धू के खिलाफ लॉबिंग कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने जहां अपने समर्थकों के साथ भंगड़ा डालकर खुशी का इजहार किया वहीं नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि फैसले के बाद लोगों की अदालतों के प्रति आस्था बढ़ेगी। वह अपना पूरा जीवन पंजाब को समर्पित करते हैं।


क्या है पूरा मामला: वर्ष 1988 में पटियाला में कार पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह के साथ सिद्धू का विवाद हो गया था और आरोप था कि इस दौरान हाथापाई तक हो गई थी और बाद में गुरनाम सिंह की अस्पताल में मौत हो गई थी। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। इसके बाद पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। सेशन कोर्ट ने इस मामले में सिद्धू और उनके साथी को बरी कर दिया।


इसके बाद मामला पंजाब एवं हाईकोर्ट में पहुंचा। 2006 में हाईकोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू और रुपिंदर सिंह को दोषी करार दिया और तीन साल कैद की सजा सुनाई। उस समय सिद्धू अमृतसर से भाजपा के सांसद थे और उनको लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था।


सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में सिद्धू एक बार फिर अमृतसर से सांसद चुने गए। इसके बाद कई राजनीतिक घटनाक्रम हुए और आज नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में स्थानीय निकाय एवं पर्यटन मंत्री हैं।

राहुल गांधी व प्रियंका का आया संदेश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि मेरा जीवन राहुल व प्रियंका को समर्पित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल और प्रियंका का मैसेज आया तो मैं भावुक हो गया।
सिद्धू ने कहा कि मेरे शरीर में जब तक लहू है राहुल गांधी के साथ खड़ा रहूंगा। मेरी एक-एक सांस अब पंजाब के लिए है और पंजाब के लिए अपना सब कुछ लगा दूंगा।

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