नहीं चेते तो पंजाब में 2025 तक जल आपातकाल की स्थिति

नहीं चेते तो पंजाब में 2025 तक जल आपातकाल की स्थिति
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| Publish: Jun, 28 2018 01:39:44 PM (IST) Chandigarh, India

पंजाब जल आपातकाल की ओर बढ रहा है। 2025 तक पंजाब में जल आपातकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी

(राजेन्द्र सिंह जादौन की रिपोर्ट)
चंडीगढ। पंजाब जल आपातकाल की ओर बढ रहा है। जल संसाधन विभाग की केबिनेट बैठक में पेश प्रस्तुति में इस मामले में गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। प्रस्तुति पर संज्ञान लेते हुए केबिनेट ने संकट से बचने के उपाय सुझाने के लिए एक सब कमेटी गठित कर दी। केबिनेट ने इसके अलावा बोर्डों में विधायकों को पद देकर संतुष्ट करने के इरादे से इनके पद लाभ की श्रेणी से मुक्त करने के लिए कानून में संशोधन का फैसला भी किया।


साठ प्रतिशत हिस्से में पानी नहीं रहेगा


मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में केबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने बताया कि जल संसाधन विभाग की ओर से पेश प्रस्तुति में कहा गया है कि आगामी 2025 तक पंजाब में जल आपातकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी। पंजाब के साठ प्रतिशत हिस्से में पानी नहीं रहेगा। जो पानी होगा वह प्रदूषित होगा। पंजाब में भूमिगत जल का दोहन 200 फीसदी तक किया जा रहा है। इस गंभीर चेतावनी को संज्ञान में लेते हुए केबिनेट ने सब कमेटी के गठन का फैसला किया। यह सब कमेटी पानी की बचत के उपाय बताएगी। सब कमेटी की रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भी भेजी जा सकेगी।

 

बोर्डो में विधायकों को पद


बादल ने बताया कि पंजाब के बोर्डो में विधायकों को पद दिए जाएंगे। इसके लिए इन पदों को लाभ के पद श्रेणी से मुक्त करने के लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंजाब के पांच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 25 हजार करोड रूपए के घाटे में चल रहे हैं। इनमें से तीन उपक्रमों के विनिवेश की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला भी किया है।

 

सम्पत्ति रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन


उन्होंने बताया कि सम्पत्ति रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन करने की शुरूआत की गई है। ऑनलाइन सम्पत्ति रजिस्टे्रशन के साथ साफ्टवेयर के जरिए सम्पत्ति के स्वामित्व की जांच भी की जा सकेगी और रजिस्टे्रशन के साथ इंतकाल भी किया जा सकेगा। बादल ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी भगोडा आर्थिक अपराधी अध्यादेश को भी अधिसूचित करने का फैसला किया गया। पंजाब सरकार अपनी सम्पत्ति की हिफाजत के लिए अलग से कानून लाएगी। इसी तरह बलात्कार के मामलों में जांच व अदालत में सुनवाई दो-दो माह में पूरी करने व अपील छह माह में निपटाने की वयवस्था के लिए केन्द्र द्वारा जारी अध्यादेश को भी लागू करने का फैसला किया गया।

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