कोरोना के कारण 1400 बच्चों ने खोए माता पिता

पिछले साल मार्च से शुरू हुए कोरोना महामारी ने अब तक देश भर में हजारों बच्चों को उनके माता पिता से अलग कर दिया है।

By: Vishal Kesharwani

Published: 11 Jun 2021, 04:59 PM IST


चेन्नई. पिछले साल मार्च से शुरू हुए कोरोना महामारी ने अब तक देश भर में हजारों बच्चों को उनके माता पिता से अलग कर दिया है। महामारी ने हजारों परिवार को बिखेर दिया और बच्चों को अनाथ कर दिया। तमिलनाडु में भी कोरोना की वजह से अब तक 1400 मासूम या तो अनाथ हो गए या माता पिता में किसी एक को खो दिया। 12 वर्षीय सुकृति नामक एक बच्ची ने बताया कि मेरे पिता को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था और निगेटिव होने के बाद घर आने के दो दिन बाद दिल का दौरा पडऩे से उनकी मौत हो गई। परिवार की आजीविका उन्ही पर निर्भर थी और अब मेरी मां घर का खर्च चलाने के लिए पूरी तरह से अकेले पड़ गई है।

 

जिला चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने बुधवार को बताया था कि राज्य भर में 1400 बच्चे या तो अनाथ हो गए या माता पिता में किसी एक को खो दिया। तमिलनाडु चाइल्ड राइट्स वॉच के संयोजक एंड्रो सेसुराज ने बताया सरकार ने कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों के लिए 5 लाख की घोषणा की है, लेकिन सुकृति जैसी बच्ची, जिसके पिता की कोरोना निगेटिव आने पर मौत हुई, के लिए किसी प्रकार की घोषणा नहीं की गई है। वायरस के कारण प्रमाणित मौतें कम हैं और अन्य कारणों से हुई मौत की संख्या अधिक है और इनमें से अधिकांश मौतें कोरोना होने के बाद हुई हैं। लेकिन ऐसे बच्चों के विवरण प्राप्त करने और सहायता प्रदान करने को लेकर किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया।

 


-स्वराज पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर हुआ मिलान
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि 1 अप्रेल 2020 से 5 जून 2021 के बीच देश भर में 30 हजार से अधिक बच्चे या तो अनाथ हो गए या किसी एक सदस्य को खो दिया। इनमें गैर कोविड रोगों के कारण होने वाली मौतें भी शामिल थी और बाल स्वराज पोर्टल के माध्यम से राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इसका मिलान किया गया था। एनसीपीसीआर के हलफनामे में तमिलनाडु मेें ऐसे 802 बच्चों का जिक्र है। लेकिन न्याय मित्र ने कहा कि राज्य के आकड़े सही नहीं है क्योंकि कई जिलों में बाल कल्याण समिति के समक्ष एक भी बच्चा पेश नहीं किया गया है।

 

-अदालत ने राज्य को पोर्टल पर विवरण डालने का दिया था निर्देश
एनसीपीसीआर चेयरपरसन प्रियांक कनुंगो ने बताया कि अदालत ने राज्य को मार्च 2020 के बाद से अनाथ या माता पिता में से किसी एक को खो चुके सभी बच्चों से संबंधित जानकारी आयोग के पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। विवरण प्रदान होने के बाद ही सभी बच्चों को कल्याणकारी योजनाओं से जोडऩे के साथ परिवार को मजबूत किया जा सकता है। हम नहीं चाहते कि अनाथ हुए बच्चे संस्थानों में चले जाएं, जब उन्हें सही देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने के अन्य तरीके हों। सभी का एक रूप से देखभाल किया जाएगा। सामाजिक रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों और नागरिक समाज समूहों की सहायता से ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है। पोर्टल में बच्चों की संख्या अपलोड किया जाएगा और सभी को सहायता प्रदान की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने की थी मुआवजे की घोषणा

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने उन नाबालिग बच्चों के नाम 5 लाख रुपए की एफडी जमा करने का आदेश दिए जिनके माता-पिता की कोरोना से मृत्यु हो गई हो। स्टालिन ने अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यह आदेश जारी किया था। इस बयान के अनुसार, अधिकारियों को उन बच्चों के संबंध में निम्नलिखित आदेश जारी किए गए हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता को कोविड -19 में खो दिया था। ऐसे हर बच्चों के नाम पर 5 लाख रुपए की फिक्सड डिपॉजिट की जाए। जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाएगा तो उस बच्चे को मूलधन और संचित ब्याज का भुगतान किया जाएगा।

 

ऐसे बच्चों को सरकारी स्वामित्व वाले घरों और छात्रावासों में प्रवेश में वरीयता दी जाएगी। राज्य सरकार उनके स्नातक होने तक उनकी शिक्षा, छात्रावास की लागत वहन करेगी। यदि किसी बच्चे के माता-पिता में से एक की कोविड-19 के कारण मृत्यु हो जाती है, तो जीवित माता-पिता को 3 लाख रुपए का भुगतान करेगी। यदि एक बच्चा जिसने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है और अपने रिश्तेदारों और अन्य लोगों के साथ रह रहा है तो उसे 18 वर्ष की आयु तक प्रति माह 3,000 रुपए का भुगतान किया जाएगा।

Vishal Kesharwani
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