Kerala जिस दफ्तर में १० साल तक झाडू लगाया, कुर्सी साफ की, वहीं बन गई सरपंच

- लोकतंत्र का रंग

- दलित महिला का जीवन संघर्ष

By: P S Kumar

Published: 08 Jan 2021, 05:19 PM IST


चेन्नई. केरल के कोल्लम जिले की पातनापुरम खंड पंचायत की दलित महिला ए. आनंदवल्ली ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस दफ्तर में रखी फाइलों को वो साफ कर रही हैं कभी उन पर उनके दस्तखत होंगे। जिन बाबुओं और कर्मचारियों को वे चाय पिला रही हैं वे उनका हाथ जोड़कर अभिवादन करेंगे। दुनिया को भले ही २०२० कोरोना की वजह से याद रहे लेकिन ३० दिसम्बर का वो क्षण आनंदवल्ली शायद ही कभी भूल पाएंगी जिस दिन उन्होंने उसी दफ्तर में सरपंच (पंचाय प्रेसिडेंट) की कुर्सी संभाली। ऐसे उदाहरण भारत देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गौरव का अभिमान कराते हैं।


छियालीस वर्षीया आनंदवल्ली की कहानी दमित वर्ग के महिला की उत्थान की गाथा है। अनुसूचित जाति की आनंदवल्ली को माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने हालिया संपन्न पंचायत चुनाव में टिकट दी थी। उनका नाम पातनापुरम खंड पंचायत के सरपंच पद के लिए प्रस्तावित था। खंड पंचायत की १३ में से माकपा नीत एलडीएफ को ७ सीटें मिलीं। जबकि आनंदवल्ली ने तलावुर वार्ड से आसानी से चुनाव जीता। फिर वे एलडीएफ की नेता चुनी गईं तथा दलित महिला के लिए आरक्षित सरपंच पद पर उनके काबिज होने का रास्ता साफ हो गया।


आनंदवल्ली का परिवार
दो बच्चों की मां आंनदवल्ली का परिवार वामपंथी विचारधारा का समर्थक है। पारिवारिक और आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने स्कूल छोड़ दी थी। उनके पति मोहनन सीपीएम कार्यकर्ता और पेंटर हैं। २०११ में ब्लॉक पंचायत कार्यालय में अंशकालिक सफाईकर्मी के रूप में आनंदवल्ली की नियुक्ति हुईं। उस वक्त उनकी पगार २ हजार रुपए थी। २०१७ तक उनको इतने रुपए ही मिले और बाद में इसे ६ हजार रुपए किया गया। सफाईकर्मी के साथ ही वे ऑफिस सहायक का भी काम करती थी। अधिकारियों व कौंसिल की मीटिंग के वक्त चाय-पानी भी पिलाती थी। लेकिन बैठक के दौरान होने वाली चर्चाओं व उठाए जाने वाले मसलों पर उनके आंख-कान खुले रहते थे। शायद उसी का फल उनको मिला।

झाडू लगाने वाले दफ्तर में सरपंच बनूंगी नहीं सोचा था
मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने बड़े पद पर बैठूंगी और वह भी वहां जहां मैंने झाडू लगाया है। मेरे गांव वाले और मेरे हाथ से चाय-पानी पीने वाले बाबू, अफसर तथा परिजन सब मुझे बतौर सरपंच देखकर खुश हैं। सभी ने हौसला बढ़ाया कि मैं चुनाव लडूं। शुरुआत में मैं काफी तनाव में थी। लेकिन इन लोगों के उत्साह के बाद चुनाव लडऩे की ठानी। मेरी ख्वाहिश है कि आसीन पद के साथ पूरा इंसाफ करूं। मुझे पूरी आशा है कि इस पद पर बिठाने वाले लोगों की पूरी सेवा करूंगी।
ए. आनंदवल्ली, सरपंच पातनापुरम खंड पंचायत

P S Kumar Editorial Incharge
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