तमिलनाडु में दूसरी लहर के बाद 70 प्रतिशत आबादी में मिली कोविड से लडऩे वाली एंटीबॉडी

विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर में ज्यादा लोगों में वायरस पहुंचा है, ऐसे में हर्ड इम्युनिटी की वजह से बीमारी की रफ्तार थम रही है।

By: PURUSHOTTAM REDDY

Published: 08 Oct 2021, 07:31 PM IST

चेन्नई.

कोरोना की खतरनाक दूसरी लहर के बाद तमिलनाडु में 70 फीसदी लोगों के शरीर में कोरोना से लडऩे वाली एंटीबॉडी विकसित हो गई हैं। हाल ही कराए गए सीरो सर्वे में सामने आया है कि राज्य के 70 प्रतिशत लोगों में कोरोना के खिलाफ जरूरी इम्युनिटी मौजूद हो सकती है।

ये अब तक का तीसरा सीरो सर्वे है। इससे पहले अक्टूबर-नवम्बर 2020 के सीरो सर्वे में 32 फीसदी में एंटीबॉडी मिली थीं। फिर मार्च-अप्रैल 2021 के सीरो सर्वे में 29 फीसदी में एंटीबॉडी मिली थी। फिर जुलाई में जारी सीरो सर्वे रिपोर्ट में 66 फीसदी आबादी में कोविड एंटीबॉडी मिली थी।

लोक स्वास्थ्य और निवारक चिकित्सा निदेशालय ने गुरुवार को 'स्टेट वाइड क्रॉस सेक्शनल सेरो सर्वे' की रिपोर्ट जारी की। इसमें तमिलनाडु के 827 क्लस्टर्स से 24,586 सैंपल्स लिए गए थे। सैंपल एकत्र करने का काम जुलाई-अगस्त महीने में किया गया था। एक क्लस्टर में 30 लोगों के सैंपल लिए गए, जिनको किसी भी इलाके से रैंडम चुना गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि समग्र सीरो प्रचलन 70 फीसदी है। वहीं तमिलनाडु के विरुदनगर में सीरो प्रचलन सबसे ज्यादा 84 फीसदी मिला। जुलाई-अगस्त 2021 के ताजा आंकड़े में जो 24,586 सैंपल लिए गए उनमें से 17,090 लोगों में कोविड से लडऩे वाली एंटीबॉडीज मिली हैं।

सबसे अधिक व कम एंटीबॉडी वाले जिले
विरुदनगर, तेनकाशी और चेन्नई में सबसे अधिक 80 प्रतिशत से अधिक आबादी में कोविड से लडऩे वाली एंटीबॉडीज मिली हैं, जबकि करूर, नीलगिरि, पेरम्बलूर और अरियालूर जिले में 60 प्रतिशत से कम आबादी में एंटीबॉडीज मिली हैं।

मास्क और वैक्सीनेशन ही प्राथमिकताएं
एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि अगर कोरोना को फैलने से बचाना है तो यहां वैक्सीनेशन और मास्क को प्राथमिकता देनी होगी। हमें तीसरी लहर के लिए पहले से ही तैयार रहना होगा और सचेत रहना होगा।


हर्ड इम्युनिटी की वजह से हार रहा कोरोना
कोरोना संक्रमण के नियंत्रण में बड़ी कामयाबी नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर में ज्यादा लोगों में वायरस पहुंचा है, ऐसे में हर्ड इम्युनिटी की वजह से बीमारी की रफ्तार थम रही है। प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेलूर के पूर्व प्रोफेसर डॉक्टर टी. जैकब जॉन ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि तमिलनाडु में 70 फीसदी नहीं बल्कि 90 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बन गई और आप इसे 100 प्रतिशत भी कह सकते है। हमें सिर्फ खतरनाक वेरिएंट पर नजर बनाए रखना है। नए वैरिएंट बनते है तो वायरस फिर पलट सकता है।

सीरो सर्वे से पता चल रहा है कि वायरस की संक्रामकता कम हो गई है। बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस के और खतरनाक वेरिएंट अब नहीं आएंगे, लेकिन हमें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि तीसरी लहर मात्र काल्पनिक है, उसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। यह लोगों का डर है।

PURUSHOTTAM REDDY
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