आरोपित आईपीएस अधिकारी का डीवीएसी से तबादला किया जाए

आरोपित आईपीएस अधिकारी का डीवीएसी से तबादला किया जाए

P S Kumar Vijayaraghwan | Publish: Sep, 07 2018 08:29:28 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

यौन उत्पीडऩ की शिकायत की पृष्ठभूमि में महिला पुलिस एसपी की याचिका

चेन्नई. महिला पुलिस एसपी के सतर्कता व भ्रष्टाचाररोधी निदेशालय (डीवीएसी) के संयुक्त निदेशक एस. मुरुगन के खिलाफ दी गई यौन उत्पीडऩ की शिकायत की पृष्ठभूमि में पीडि़ता ने मद्रास उच्च न्यायालय में अर्जी लगाई है कि उक्त अधिकारी का किसी सामान्य पद पर तबादला किया जाए ताकि जांच प्रक्रिया अप्रभावित रहे। पीडि़ता ने चार अगस्त को इस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दी थी। याचिका को स्वीकारते हुए जज शत्रुघ्न पुजाहारी ने डीवीएसी को ११ सितम्बर तक जवाब पेश करने का नोटिस जारी किया।

याची के अनुसार वह मुरुगन का उत्पीडऩ सहन नहीं कर सकी। उसने तीन अगस्त को डीवीएसी के निदेशक को मौखिक शिकायत की। इसके अगले दिन उसने विभिन्न घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए लिखित में शिकायत दी। याची ने डीवीएसी निदेशक से आग्रह किया था कि उसकी शिकायत कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीडऩ (रोकथाम, निषेध और निपटारा) कानून के तहत दर्ज की जाए। डीवीएसी से उनको तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। फिर पीडि़ता को पता चला कि निदेशक ने ६ अगस्त को एक बैठक बुलाई और उनकी शिकायत पर आंतरिक शिकायत समिति को पड़ताल के लिए अधिकृत किया गया है।

पीडि़ता ने कोर्ट को बताया कि इस समिति की चेयरपर्सन वे थी इसलिए उन्होंने निदेशक से अनुरोध किया था कि उनके समकक्षी अन्य अधिकारी की नियुक्ति कर जांच कराई जाए। महिला एसपी ने यह भी संदेह जताया कि मुरुगन के उसी कार्यालय में ऊंचे ओहदे पर बने रहने से जांच कार्रवाई निष्पक्ष नहीं हो पाएगी क्योंकि उनके सहकर्मी और अन्य स्टाफ गवाही देने से कतराएंगे। इन परिस्थितियों में पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित आंतरिक समिति के समक्ष महिला एसपी पेश हुईं जबकि मुरुगन डीवीएसी के संयुक्त निदेशक पर तैनात थे। वादी ने कहा कि उनके इस पद पर रहने से जांच प्रक्रिया निष्प्रभावी रहेगी। जिन भी गवाहों से पूछताछ होगी वे सभी मुरुगन के अधीनस्थ हैं।

वादी एसपी ने हाईकोर्ट में डीजीपी द्वारा गठित नई आंतरिक समिति के औचित्य पर भी सवाल उठाया कि इसमें बाहर का कोई भी सदस्य नहीं है। कोर्ट को इस समिति को निरस्त कर देना चाहिए और डीजीपी को आदेश देना चाहिए कि वे कानूनन नई समिति बनाएं। मौजूदा आंतरिक समिति की अध्यक्ष सीमा अग्रवाल, एस. अरुणाचलम, पी. सी. तेनमोझी, सेवानिवृत्त एसपी एस. सरस्वती और वी. के. रमेश बाबू हैं।

याची ने कहा कि कमेटी में महिला अधिकारों के लिए कार्यरत एनजीओ का भी कोई सदस्य नहीं है। एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी है जिनको आज भी विभाग से पेंशन हासिल है। यह समिति पूरी तरह विधिसम्मत नहीं है। कानून कहता है कि आंतरिक समिति में उस कार्यस्थल से जुड़े सदस्य होने चाहिए। इसमें पूर्व कर्मचारियों को सदस्य बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

जज ने एसपी की शिकायत पर गौर करते हुए पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित आंतरिक समिति को भी जवाबी पक्ष बनाने का निर्देश दिया।

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