धीरता, गंभीरता व उदारता के धनी थे आचार्य विजय जयंतसेनसूरी

धीरता, गंभीरता व उदारता के धनी थे आचार्य विजय जयंतसेनसूरी

Mukesh Sharma | Publish: Apr, 17 2018 10:18:36 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

पुण्य सम्राट जयंतसेनसूरीजी फाउंडेशन के तत्वावधान में साहुकारपेट में एकाम्बरेश्वर अग्रवाहरम स्ट्रीट स्थित राजेंद्र भवन में आचार्य विजय जयंतसेन सूरी की

चेन्नई।पुण्य सम्राट जयंतसेनसूरीजी फाउंडेशन के तत्वावधान में साहुकारपेट में एकाम्बरेश्वर अग्रवाहरम स्ट्रीट स्थित राजेंद्र भवन में आचार्य विजय जयंतसेन सूरी की प्रथम पुण्य तिथि समारोहपूर्वक मनाई गई। आचार्यवृंद रत्नाकरसूरी, रत्नसेनसूरी व कीर्तिप्रभसूरी व गणिवर्य पदमचंद सूरी के सान्निध्य में आयोजित इस समारोह की शुरुआत दिलीप वेदमूथा के स्वागत भाषण से हुई जिसमें उन आचार्य के जीवन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद दीप प्रज्वलन हुआ एवं आचार्य के चित्र पर माल्यार्पण के बाद आचार्य रत्नाकरसूरी ने कहा आचार्य भले आज हमारे समक्ष नहीं हैं लेकिन उनके आदर्श एवं उपदेश व उपलब्धियां हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी। भले ही वे चले गए लेकिन उनकी सुवास आज भी है और हमेशा रहेगी।

आचार्य कीर्तिप्रभ सागर ने गुणानुवाद किया जिसमें उन्होंने आचार्य के बाल्यकाल से जीवन छोडऩे तक उनकी उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आचार्य ने समाज को जोडऩे का काम किया। उन्होंने ६५ चातुर्मास किए। ८ हॉस्पिटल बनाए, सात गौशालाएं बनवाई, ४१ महासम्मेलन करवाए, २३६ प्राण-प्रतिष्ठा करवाई, ३६०० तीर्थधाम बनवाए एवं ३५० पुस्तकें लिखी।

गणिवर्य पदमचंद सागर ने कहा खुद के लिए तो सभी जीते हैं, दूसरों के लिए जीने वाले बहुत कम होते हैं। लेकिन आचार्य ने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा को ही समर्पित कर दिया था। यशस्वी वही बनता है जिसमें गंभीरता, धीरता व उदारता के गुण हों। ये तीनों गुण आचार्य में विद्यमान थे। वे निरभिमानी थे और छोटी कलम से बड़ा लेखन करने वाले आचार्य थे। उन्होंने कहा इन्सान को परिस्थिति से लडऩा सीखना चाहिए। अपने स्तर यानी धरातल को न छोड़े। इन्सान की पहचान उसके शरीर नहीं मन से होती है। शरीर एवं शक्ल से नहीं। आचार्य रत्नसेन सूरी ने कहा गुणवान व्यक्तियों का गुणगान करने से उनके गुणों की प्राप्ति होती है। उन्होंने गुरु की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

समारोह में कैलाश कोठारी, फतेहराज जैन, कीर्ति तलावत भवरलाल, मुकेश जैन, जयंतीलाल कोठारी, राजूभाई, मांगीलाल जैन व कैलाश जैन तथा ट्रस्ट मंडलों के पदाधिकारियों का सहयोग रहा। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

सतीश के पदक जीतने पर नेताओं ने दी बधाई

कॉमनवेल्थ गेम में स्वर्ण पदक जीतने वाले सतीश कुमार शिवलिंगम को तमिलनाडु के नेताओं ने बधाई दी। उपमुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेलवम ने सतीश को बधाई देते हुए कहा कि सतीश ने वेलूर जिले और तमिलनाडु का नाम ऊंचा किया है। मैं आशा करता हूं कि वह ऐसे ही हमारे प्रदेश व देश का नाम ऊंचा करते रहेंगे। वहीं डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा कि सतीश ने तमिलनाडु का गौरव बढ़ाया है। मंै आशा करता हूं कि सतीश का ओलम्पिक में जीतने का सपना भी साकार हो। एएमएमके के संस्थापक और आरके नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक टीटीवी दिनकरण ने सतीश को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने तमिलनाडु और देश का गौरव बढ़ाया है।


सतीश को सहायता देने में सरकार रही विफल

राज्य सरकार पर एक बार फिर से हमला करते हुए मक्कल नीदि मय्यम के संस्थापक और अभिनेता कमल हासन ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम में पदक विजेता सतीश की मदद करने में सरकार विफल रही है। वेट लिफ्टिंग में दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतने वाले सतीश कुमार शिवलिंगम को बधाई देते हुए कमल ने कहा कि सरकार ने अगर पदक जीतने से पहले सतीश की मदद की होती तो आज देश के नाम और भी मेडल हो सकते थे। भारत से अन्य विजेताओं मिराबाई चानु, संजिता चानु, रागला वेंकट राहुल को भी उन्होंने बधाई दी।

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