2जी घोटाले का दाग मिटाने को फिर से नीलगिरि की 'प्रजा' के भरोसे राजा

2जी घोटाले का दाग मिटाने को फिर से नीलगिरि की 'प्रजा' के भरोसे राजा

Purushotham Reddy | Publish: Apr, 17 2019 03:00:19 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 03:00:20 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

नीलगिरि लोकसभा क्षेत्र

चेन्नई.
नीलगिरि तमिलनाडु की 19वीं लोकसभा सीट है, जो कि पश्चिमी घाट पर बसा एक शहर है। यह सीट शुरुआत से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। 2014 के आम चुनाव में ए. राजा को इस सीट पर एआईएडीएमके उम्मीदवार ने हराया था। ए. राजा के हार की वजह बना 2-जी स्कैम।
2-जी स्कैम को लेकर राजनीतिक जगत के लोग क्या सोचते हैं, ए. राजा को इससे फर्क नहीं पड़ता। वे अपने विरोधियों को गलत साबित करने के लिए जनता की अदालत में जा पहुंचे हैं। ए. राजा तमिलनाडु की नीलगिरि रिजर्व सीट से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। घोटाले के दाग से बेपरवाह ए. राजा नीलगिरि में दोबारा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त भी हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के उम्मीदवार से है।
तमिलनाडु के पूर्व सीएम एम. करुणानिधि के करीबी रहे ए. राजा नीलगिरि सीट पर बाहरी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में होंगे। यानी ये उनकी प्रतिष्ठित सीट नहीं है। ए. राजा मूल रूप से तमिलनाडु के मैदानी क्षेत्र पेरम्बलूर से आते हैं। यहां से वह डीएमके की टिकट पर दो बार चुनाव भी जीत चुके हैं।
नीलगिरी सीट के अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होने के बाद ए. राजा 2009 के चुनाव में पेरम्बलूर की बजाय इस सीट से मैदान में उतरे और जीत हासिल की। लेकिन, 2014 में उन्हें इसी सीट से एआईएडीएमके के गोपालाकृष्णन से शिकस्त मिली।
एआईएडीएमके ने इस बार नीलगिरि सीट से एम. त्यागराजन को खड़ा किया है। इस सीट पर कुछ छोटी पार्टियों ने भी उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला डीएमके के ए. राजा और एआईएडीएमके के त्यागराजन के बीच है।
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में धुर-विरोधी एआईएडीएमके व डीएमके 8 सीटों पर एक दूसरे के आमने-सामने हैं। दोनों दलों के बीच दक्षिण चेन्नई, कांचीपुरम (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), तिरुनेलवेली, मइलादुतुरै, सेलम, नीलगिरि (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित) और पोल्लाची सीट पर सीधी लड़ाई है। एआईएडीएमके और डीएमके राज्य में 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। शेष 19 सीटें उन्होंने अपनी-अपनी सहयोगी पार्टियों को दिया है।
मजे की बात ये है कि स्थानीय लोगों के लिए भी ये बात मायने नहीं रखती कि ए. राजा का नाम टेलीकॉम घोटाले में आया। लोगों का कहना है कि उन्होंने अच्छा काम किया है। कोई भी उनसे मिल सकता है और वो उसकी मदद करते हैं।
वहीं कुछ लोग एआईएडीएमके के बीजेपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं हूं। यहां के लोगों में कई कारणों से बीजेपी को लेकर गुस्सा है। ए राजा लोगों के साथ आसानी से घुल-मिल जाते हैं। जमीनी मुद्दों को समझते हैं। इस क्षेत्र में उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। एआईएडीएमके में आंतरिक सिर फुटौव्वल का फायदा भी राजा को मिल रहा है। एआईएडीएमके से अलग हुआ धड़ा एएमएमके का नेतृत्व किसी जमाने में जयललिता की बहुत करीबी रहीं शशिकला नटराजन के भतीजे टीटीवी दिनकरण कर रहे हैं। वे भी ईपीएस ओपीएस के वोट में सेंध लगाएंगे। ए.राजा नीलगिरि में काफी लोकप्रिय हैं। पिछली बार उनके खिलाफ जो नकारात्मक प्रचार हुआ, उसकी वजह से वे चुनाव हार गए और उस समय जयललिता जीवित थीं और वह मुख्यमंत्री थी।
कुल मतदाता : १३६५६०८
कुल प्रत्याशी :१०

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