scriptbio village model in puduchery | पुदुचेरी के 13 गांवों में शुरू किया गया बायो विलेज मॉडल देश दुनिया के लिए बना मिसाल | Patrika News

पुदुचेरी के 13 गांवों में शुरू किया गया बायो विलेज मॉडल देश दुनिया के लिए बना मिसाल

-ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने के साथ साथ युवाओं को कृषि से जोड़ने का मॉडल

-उड़ीसा, केरल व आंध्रप्रदेश तक पहुंची यह परियोजना

- इकोफ्रेंडली एवं आर्गेनिक कृषि

चेन्नई

Published: December 31, 2021 11:28:04 pm

चेन्नई.

1991 में की गई बायोटेक्नालाजी इन एग्रीकल्चर ए डायलॉग की एक सिफारिश आज देश दुनिया के लिए मिसाल बन चुका है। यह अनुशंसा थी बायो विलेज मॉडल प्रोजेक्ट की। इसके एक साल बाद महर्षि अरविन्दो की धरती पुदुचेरी के 13 गांवों में किया गया बायो विलेज मॉडल का यह बीजारोपण आज दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। अकेले पुदुचेरी में ही यह मॉडल 250 गांवों तक पहुंच चुका है। वहां की गरीब महिलाओं की जिंदगी को रोशन कर रहा है। दरअसल एम.एस.स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के नेतृत्व में विभिन्न एजेंसियों ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। जॉब लेड इकोनोमिक ग्रोथ एवं स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर पुदुचेरी में किया गया यह प्रयोग इतना सफल रहा कि देश के कई राज्य एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसको अपनाया जाने लगा।
पुदुचेरी के 13 गांवों में शुरू किया गया बायो विलेज मॉडल देश दुनिया के लिए बना मिसाल
पुदुचेरी के 13 गांवों में शुरू किया गया बायो विलेज मॉडल देश दुनिया के लिए बना मिसाल
महिला सशक्तिकरण एवं युवाओं पर फोकस यह प्रोजेक्ट उड़ीसा, केरल एवं आंध्रप्रदेश में पहुंच चुका है। फाउंडेशन के वैज्ञानिक डा.परशुरामन इस संबंध में कहते हैं जिस आर्गेनिक खेती की बात आज हो रही है उसकी शुरुआत उस समय ही हो चुकी थी। यह पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। आज स्थिति यह है कि पुदुचेरी से उत्पादित कृषि उत्पादों का निर्यात तक होने लगा है। यह सतत स्वयं सहायता समूह पर आधारित माडल है। इसमें स्थानीय जरूरतों एवं छोटे किसानों को ध्यान में रखा गया है। वे कहते हैं इसको जन सहभागिता के साथ साथ नेशनल मुवमेंट का रूप देने की जरूरत है।
ये है लक्ष्य

बायो विलेज मॉडल का लक्ष्य गरीब ग्रामीण जनता को वित्तीय सहायता एवं खेती की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में बताना है। उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि मिट्टी एवं जल का संरक्षण कैसे करें। इसलिए यह उन क्षेत्रों के लिए भी कारगर है जहां पानी की कमी है। इस परियोजना का नेतृत्व मुख्य रूप से महिलाएं कर रही है और इससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है। साथ ही उनके उत्पादों का विपणन कैसे हो यह जानकारी दी जा रही है। शुरुआत में मशरूम की खेती, संकर सब्जी उत्पादन और मछली पालन से इसकी नींव रखी गई। बायोविलेज परियोजना के एजेंडे में परती भूमि को उपजाऊ बनाना भी शामिल है।
बायो विलेज के तहत कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कृषि में वैज्ञानिक तकनीक के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि कैसे मिट्टी एवं पानी का संरक्षण करें। यही नहीं खेती के बाद उनके उत्पादों का विपणन कैसे करना इसके भी गुर सिखाएं जाते हैं। यह उन भूमिहीन, छोटे, गरीब किसान एवं महिलाओं के लिए कारगर मॉडल है जो दो जून की रोटी की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाते। इसके तहत विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से कच्चे माल समेत अन्य वित्तीय सहयोग दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य बायोटेक्नालाजी से उपयोग से लाभ पहुंचाना है।
इस मॉडल में पांच प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है

1. कृषि 2.पशुपालन 3.फूलों की खेती 4. बागवानी 5. मत्स्य पालन

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