रक्त की हर यूनिट तीन लोगों की जान बचाती है, स्वैच्छिक दान के लिए जागरूकता की जरुरत

रक्त की हर यूनिट तीन लोगों की जान बचाती है, स्वैच्छिक दान के लिए जागरूकता की जरुरत
- मद्रास मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एस सुभाष ने कहा
- रक्तदान, इसका महत्व, तथ्य और मिथक वेबीनार

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 21 Jul 2021, 12:45 AM IST

चेन्नई. रक्त की प्रत्येक इकाई तीन लोगों की जान बचाती है और स्वैच्छिक दान का आग्रह करने के लिए व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। मद्रास मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागके प्रमुख प्रोफेसर डॉ. एस सुभाष ने यह बात कही। रक्तदान, इसका महत्व, तथ्य और मिथक पर वेबीनार के दौरान उन्होंने कहा कि पहली या दूसरी खुराक के बावजूद कोविड वैक्सीन लेने के 14 दिन बाद कोई व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। भले ही यह सुरक्षित है, हम लोगों को रक्तदान करने के 48 से 72 घंटे बाद वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए रक्तदान को एक मिनी मास्टर स्वास्थ्य जांच माना जा सकता है क्योंकि रक्तदान के लिए पात्र पाए जाने से पहले ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन काउंट आदि जैसी विभिन्न जांचों की जांच की जाती है।
कोविड -19 महामारी के दौरान रक्तदान को लेकर फैले विभिन्न मिथकों के बारे में डॉ सुभाष ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो कोविड से प्रभावित है, वह 28 दिनों के स्वस्थ होने के बाद रक्तदान कर सकता है। कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि कोविड रक्त संचरण के माध्यम से फैलता है। उन्होंने कहा कि शिविर जैसे विभिन्न प्रचार उपाय पूरे वर्ष आयोजित किए जाते हैं, लेकिन महामारी के कारण दानदाताओं की संख्या में कमी आई है।
वर्क फ्रॉम होम कल्चर के चलते रक्तदाता हुए कम
एनीटाइम ब्लड डोनर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य जी. वेंकट ने कहा कि वैश्विक महामारी से पहले कॉलेजों और आईटी कंपनियों के अधिक लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया था। लेकिन वर्क फ्रॉम होम कल्चर और कई अन्य कठिनाइयों के कारण स्वयंसेवकों की संख्या कम हो गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति वास्तव में ब्लड बैंक और मेडिकल स्टाफ के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। गर्भावस्था, दुर्घटना के मामले, कीमोथेरेपी, यकृत रोग, हृदय की जटिलताएं, गुर्दे की समस्याएं और डायलिसिस प्रमुख स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनमें रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि दानदाताओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत है और छात्रों को स्कूल स्तर से ही आजीवन दाता बनने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
सोशल मीडिया बन सकती है मददगार
मीनाक्षी महिला महाविद्यालय में प्रोफेसर वी. विजयश्री ने छात्रों से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से रक्तदान के बारे में जागरूकता पैदा करने की पहल करें क्योंकि इसकी व्यापक पहुंच है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कॉलेज जैसे संस्थान रचनात्मक पोस्टरों के साथ आ सकते हैं जो मुख्य विशेषताओं को उजागर करते हैं ताकि रक्तदान करने की आवश्यकता के महत्वपूर्ण पहलुओं को आश्चर्यजनक तरीके से बताया जा सके।
केवल एक फीसदी कर रहे रक्तदान
क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो चेन्नई के निदेशक जे. कामराज ने इस तथ्य को दोहराया कि स्थानीय निकायों के स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य केंद्रों में विभिन्न बीमारियों के लिए रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान के मामले में छोटे देश भी बहुत आगे हैं, जबकि 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 1 फीसदी भी इस नेक काम में दिलचस्पी नहीं दिखाते। फील्ड आउटरीच ब्यूरो पुदुचेरी के उप निदेशक डॉ. शिवकुमार ने स्वागत किया। विद्या ए आर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। रक्तदान की लाभार्थी गायत्री सुब्रमण्यम ने समय पर मदद के लिए रक्तदाताओं का आभार जताया। सूचना मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का प्रसारण क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो और प्रेस सूचना ब्यूरो चेन्नई की ओर से किया गया।

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