पुलिस का क्रूर चेहरा

लॉकडाउन में पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आने लगा है। कुछ दिन पहले ही पिता-पुत्र की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई से मौत हो गई थी, अब एक ऑटो चालक उसकी बर्बरता का शिकार हुआ।

By: Ashok Rajpurohit

Published: 29 Jun 2020, 08:40 PM IST

चेन्नई. लॉकडाउन में पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आने लगा है। कुछ दिन पहले ही पिता-पुत्र की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई से मौत हो गई थी, अब एक ऑटो चालक उसकी बर्बरता का शिकार हुआ। पुलिस की ज्यादती से तमिलनाडु में तीन जनों को जान गंवानी पड़ी। लॉकडाउन के दौरान देशभर में पुलिस के प्रति जनता के मन में एक अच्छी छवि बनी थी जिसे तमिलनाडु की पुलिस ने धो दिया। तेनकाशी जिले के 25 वर्षीय ऑटो चालक कुमरेशन को पुलिस ज्यादती के चलते जान गंवानी पड़ी। मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसकी किडनी व तिल्ली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। तेनकाशी जिले के वी.के. पुदूर पुलिस स्टेशन में 10 मई को उसे बुरी तरह पीटा गया। करीब 47 दिन तक जीवन-मौत से संघर्ष के बाद आखिर मौत की नींद सो गया। उसके पिता नवनीतकृष्णन का आरोप है कि पुलिस स्टेशन में दो पुलिस वालों ने उसके बेटे को बुरी तरह मारा-पीटा। उसके शरीर से दो दिन तक रक्त का प्रवाह होता रहा। पिता का यह भी आरोप है कि जब कुमरेशन को अस्पताल में भर्ती किया गया तब वहां भी पुलिस ने उसे धमकाया और इस घटना के बारे में किसी को बताने पर अंंजाम भुगतने की चेतावनी दी। इतना ही नहीं पुलिस ने यह भी धमकी दी कि उसे गुण्डा एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर जेल में डाल दिया जाएगा। कुमरेशन के परिजनों ने 18 जून को दो पुलिसकर्मियों उपनिरीक्षक चन्द्रशेखर व कांस्टेबल कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई, लेकिन दस दिनों तक एफआईआर दर्ज ही नहीं की गई। प्राथमिकी 28 जून को कुमरेशन के दम तोडऩे के कुछ घंटे बाद दर्ज की गई। तुत्तुकुड़ी जिले में हुई घटना में भी उन पिता-पुत्र का कसूर सिर्फ इतना ही था कि लॉकडाउन के दौरान तय समय के बाद भी उनकी दुकान खुली रह गई। उन्होंने कोई बड़ा अपराध नहीं किया था। ऐसे में पुलिस उन्नको चेतावनी देकर छोड़ सकती थी या फिर जुर्माना वसूल सकती थी, लेकिन इस तरह अमानवीय यातना किसी भी सूरत में बर्दाश्त योग्य नहीं है। पता चला है उसी पुलिस स्टेशन में पहले भी लोगों को टार्चर किया जा चुका है। बीते दो सप्ताह में कम से कम एक दर्जन लोगों को बुरी तरह से प्रताडि़त किया गया। इनमें से एक की मौत हो चुकी है और दो अभी अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस पर हिरासत में बर्बर यातना देने के संगीन आरोप लगे हैं। यह मामला समूचे देश में चर्चा में आ गया है। इस मामले में तीन पुलिसकर्मी सस्पेेंड किए जा चुके हैं। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा की है। पुलिस की इस बर्बरता पर कॉलीवुड का गुस्सा भी फूटा है।
पुलिस पर कानून की रखवाली का जिम्मा है लेकिन यदि वह भी मुंह मोडऩे लगी तो फिर आम आदमी किससे आस करे। यही कारण है कि पुलिस की कू्रर छवि के चलते लोग एफआईआर दर्ज करवाने से कतराते हैं। प्राथमिकी दर्ज करवाने जाओ तो पुलिस आसानी से दर्ज नहीं करती और कई दिनों तक बेमतलब के चक्कर कटवाती है। कई बार कोर्ट के माध्यम से एफआईआर दर्ज करवानी पड़ती है। ऐसे में आम आदमी पुलिस थाने जाने से भी डरता है। पुलिस ने जिस तरह लॉकडाउन में लोगों का विश्वास जीत कर आमजन के प्रति पुलिस ने अच्छी छवि बनाई थी जिसे तमिलनाडु पुलिस ने धूमिल कर दिया। किसी साधारण कृत्य या अपराध के लिए पुलिस बर्बरता से पेश आने लगे तो ऐसी स्थिति किसी भी दृष्टि से सही नहीं ठहराई जा सकती। पुलिस को अपनी छवि सुधारनी होगी। पुलिस को धैर्य से काम लेने की जरूरत है। जरूरत हो तो पुलिस को मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया जाए।

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