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कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे

युवा महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे
- स्तन कैंसर के मामले में महिलाओं की औसत आयु 60 से घटकर 40 हो गई
- शुरुआती मासिक धर्म, स्तनपान के महीनों की कम संख्या, भोजन की आदतें और जीवनशैली में बदलाव कारण

चेन्नई

Published: October 26, 2021 11:46:47 pm

चेन्नई. कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टर कम उम्र में कैंसर का पता लगाने के लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं, जिनमें शुरुआती मासिक धर्म, स्तनपान के महीनों की कम संख्या, भोजन की आदतें और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं। ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि वे स्तन कैंसर के मामले में महिलाओं की औसत आयु 60 से घटकर 40 हो गई है।
महात्मा गांधी मेमोरियल गवर्नमेंट हॉस्पिटल (एमजीएमजीएच) के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एस सुरेश कुमार का कहना है कि अस्पताल में स्तन कैंसर के तीन मामलों में से एक 30 और 40 उम्र की महिला होती है। डॉ सुरेश कहते हैं, शुरुआती मासिक धर्म भी एक कारण हो सकता है।
स्तन कैंसर के रोगियों में लगातार और तेज वृद्धि
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ केएन श्रीनिवासन कहते हैं, मैंने 2000 से 2015 तक स्तन कैंसर के रोगियों में लगातार और तेज वृद्धि देखी है। वे खराब स्तनपान की ओर इशारा करते हैं। स्तनपान कराने वाले महीनों की संख्या बहुत कम हो गई है। हालांकि पिछले 2-3 वर्षों से राज्य में स्तनपान के लिए एक मजबूत अभियान चल रहा है और हमें उम्मीद है कि अब से 5-8 साल बाद अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।
मासिक धर्म के सात दिन बाद जांच जरुरी
डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं के लिए स्तन की नियमित स्व-परीक्षा करना बहुत जरूरी है।महिलाओं को मासिक धर्म के सात दिन बाद हर महीने अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए। एक बार जब वे नियमित रूप से जांच शुरू कर देती हैं, तो वे बहुत जल्द परिवर्तनों का पता लगा सकती हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि जल्दी पता लगने से इलाज में आसानी रहती है।
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महिलाएं पहले से अधिक जागरुक
राजस्थानी एसोसिएशन की महिला इकाई गणगौर पिछले करीब डेढ़ दशक से महिलाओं के लिए कैंसर कैंप लगा रही है। पहले महिलाएं कैंसर जांच कराने से हिचकिचाती थी लेकिन अब हालात बदले हैं। वे खुद आगे चलकर जांच करा रही है। गणगौर की ओर से भी शुरुआत में स्कूलों में कैंसर कैंप रखे गए थे। बाद में अन्य स्थानों पर भी इस तरह के कैंप आयोजित किए जाने लगे हैं। अब तक गणगौर ने करीब एक सौ के आसपास इस तरह के कैंप लगाए हैं। महिलाओं को मोटिवेट भी किया जा रहा है।
- सरिता खेमका, पूर्व अध्यक्ष, गणगौर, राजस्थानी एसोसिएशन की महिला इकाई।

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