script बिल की हत्या नहीं कर सकते...', तमिलनाडु विस से पारित विधेयकों पर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालें राज्यपाल: सुप्रीम कोर्ट | Cant withhold assent then refer to President SC asks TN governor | Patrika News

बिल की हत्या नहीं कर सकते...', तमिलनाडु विस से पारित विधेयकों पर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालें राज्यपाल: सुप्रीम कोर्ट

locationचेन्नईPublished: Dec 01, 2023 04:02:58 pm

Submitted by:

PURUSHOTTAM REDDY

अगर राज्यपाल मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करते हैं और गतिरोध को हल करते हैं तो अदालत इसकी सराहना करेगी। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल किसी बिल की हत्या नहीं कर सकते।

बिल की हत्या नहीं कर सकते...', तमिलनाडु विस से पारित विधेयकों पर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालें राज्यपाल: सुप्रीम कोर्ट
बिल की हत्या नहीं कर सकते...', तमिलनाडु विस से पारित विधेयकों पर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालें राज्यपाल: सुप्रीम कोर्ट

चेन्नई.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और राज्य के राज्यपाल के बीच कई चीजें हैं जिन्हें सुलझाना है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्यपाल मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करते हैं और गतिरोध को हल करते हैं तो अदालत इसकी सराहना करेगी। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल किसी बिल की हत्या नहीं कर सकते।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश जे बी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि मिस्टर अटॉर्नी जनरल, हम चाहेंगे कि राज्यपाल इस गतिरोध को हल करें। हम इस तथ्य से अवगत हैं कि हम उच्च संवैधानिक पदाधिकारी के बारे में बात कर रहे हैं। अनुच्छेद 200 के मूल भाग के तहत राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं: वह विधेयक पर सहमति दे सकता है, या वह सहमति रोक सकता है, या वह इसे सुरक्षित रख सकता है। इस मामले में सीजेआइ ने कहा कि आप कहते हैं कि नवम्बर 2023 में उन्होंने सहमति रोक दी थी। अब, एक बार जब उन्होंने सहमति रोक दी तो इसे राष्ट्रपति को संदर्भित करने का कोई सवाल ही नहीं है। एजी ने जवाब दिया कि यह एक खुला प्रश्न है और इसकी जांच की जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं। उन्हें उनमें एक से एक का पालन करना होगा: सहमति देना, अनुमति रोकना और इसे राष्ट्रपति के पास भेजना। इसलिए, जब वह सहमति रोकता है तो फिर वह यह नहीं कह सकता कि अब मैं इसे राष्ट्रपति के पास भेज रहा हूं। सीजेआइ ने कहा कि हम इसे बहुत आम बोलचाल की भाषा में कहें तो वह बिल को वहां नहीं रोक सकते। विस्तृत सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की। 20 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सहमति के लिए प्रस्तुत बिलों के निपटान में तमिलनाडु के राज्यपाल की ओर से देरी पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने कहा था कि बिल जनवरी 2020 से लंबित हैं और राज्यपाल तीन साल से क्या कर रहे थे?

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