आखिर तमिलनाडु को पानी देने से आनाकानी क्यों कर रहा कर्नाटक, सवा सौ साल पुराना है कावेरी जल विवाद

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आखिर तमिलनाडु को पानी देने से आनाकानी क्यों कर रहा कर्नाटक
सवा सौ साल पुराना है कावेरी जल विवाद
तमिलनाडु व कर्नाटक सिंचाई के लिए कावेरी पर निर्भर, यही विवाद का कारण

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 27 Jun 2021, 08:16 PM IST

चेन्नई. तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के जल के बंटवारे को लेकर विवाद कोई सवा सौ साल पुराना है। दोनों राज्यों के कई जिले सिंचाई के लिए कावेरी पर निर्भर है और इसी वजह से विवाद जारी है। दोनों ही राज्यों को ज्यादा से ज्यादा पानी चाहिए इसीलिए कोई एक पक्ष झुकने को तैयार नहीं है। कावेरी जल विवाद को लेकर कई बार निर्णय तो हुए लेकिन पूरी तरह से कभी भी लागू नहीं हो सके। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भी कर्नाटक ने तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी नहीं दिया। ऐसे में कावेरी नदी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में कई बार हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं।
मेकेडाटु बांध का विरोध
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की हाल ही 12 वीं बैठक में कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया। जिसके तहत जून में 9.19 टीएमसी फीट तथा जुलाई में 31.24 टीएमसी फीट पानी छोड़ने की बात कही गई। कर्नाटक के कावेरी नदी पर मेकेडाटु पर बांध बनाने का भी तमिलनाडु ने विरोध किया है। तमिलनाडु ने प्राधिकरण से यह भी मांग की कि यह मामला उच्चतम न्याायलय में है और कर्नाटक को बांध बनाने के प्रारम्भिक काम से रोका जाना चाहिए।
कावेरी का उद्गम कर्नाटक से
कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक के कोडागु ज़िले के ब्रह्मगिरि पर्वत के तालकावेरी से होता है। यह लगभग 800 किलोमीटर लंबी है और मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु में बहती है। कर्नाटक में जहां इसका जलग्रहण क्षेत्र 34,273 वर्ग किमी है वही तमिलनाडु में इसका जलग्रहण क्षेत्र 43,868 वर्ग किमी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़नेवाले प्रमुख राज्य हैं। इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है जबकि समुद्र में मिलने से पहले ये नदी करैकल से होकर गुजरती है जो पुदुचेरी का हिस्सा है। इसलिए इस नदी के जल बंटवारे को लेकर हमेशा बवाल होता रहता है।
मद्रास प्रेसीडेन्सी व मैसूर राज से बवाल
यह बवाल 19वीं शताब्दी में मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज के बीच में शुरू हुआ था। 1924 में इन दोनों के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते में बाद में केरल और पुदुचेरी भी शामिल हो गए थे। कर्नाटक का मानना है कि अंग्रेज़ों की हुकूमत के दौरान कर्नाटक एक रियासत थी जबकि तमिलनाडु सीधे ब्रिटिश राज के अधीन था इसलिए 1924 में कावेरी जल विवाद पर हुए समझौते में उसके साथ न्याय नहीं हुआ। 1924 के समझौते ने मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर राज्य को कावेरी नदी से अधिशेष पानी का उपयोग करने का अधिकार दिया। समझौते के अनुसार तमिलनाडु और पुदुचेरी को अधिशेष जल का 75 फीसदी मिलेगा, जबकि कर्नाटक को 23 प्रतिशत मिलेगा। शेष पानी केरल के लिए था। इस मामले में 1972 में गठित एक कमेटी की रिपोर्ट के बाद 1976 में कावेरी जल विवाद के सभी चार दावेदारों के बीच एग्रीमेंट किया गया, जिसकी घोषणा संसद में हुई थी और साल 1990 में तमिलनाडु की मांग पर प्राधिकरण का भी गठन हुआ था जिसमें ये फैसला किया गया था कि कर्नाटक की ओर से कावेरी जल का तय हिस्सा तमिलनाडु को मिलेगा लेकिन बाद में कर्नाटक इससे मुकर गया।
तमिलनाडु को 177.25 टीएमसी फीट पानी
बाद में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को एक ट्रिब्यूनल बनाने का निर्देश दिया। जिसने वर्ष 1991 में एक अंतरिम फैसले में तमिलनाडु को 205 टीएमसी फिट (यानी कि 205 अरब क्यूबिक फीट) पानी देने को कहा गया। ट्रिब्यूनल के इस फैसले से दोनों राज्यों में दंगे भड़क उठे। उच्चतम न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बनाए रखा। ट्रिब्युनल ने अपना मुख्य फैसला लगभग 16 साल बाद 2007 में दिया। कावेरी बेसिन में 740 टीएमसी फीट (अरब क्यूबिक फीट) पानी माना और फैसला दिया कि प्रतिवर्ष 419 टीएमसी फीट पानी पर तमिलनाडु का हक बनता है और 270 टीएमसी फीट पानी पर कर्नाटक का। इसके साथ ही केरल को 30 टीएमसी फीट और पुदुचेरी को 7 टीएमसी फीट पानी पर अधिकार दिया गया। सामान्य मानसून वर्ष में कर्नाटक को हर साल 192 टीएमसी फीट पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ना होगा। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल विवाद ट्रिब्युल द्वारा 2007 में दिये गए फैसले के खिलाफ कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल द्वारा दायर याचिकाओं पर फरवरी 2018 में सुनवाई की। इस फैसले में तमिलनाडु को मिलने वाले 192 टीएमसी फीट (अरब क्यूबिक फीट) पानी को घटाकर 177.25 टीएमसी फीट कर दिया गया यानी कि इसमें 14.75 टीएमसी फीट की कमी कर दी और इस पानी को कर्नाटक को दे दिया गया। इस तरह से कर्नाटक को अब 14.75 टीएमसी फीट पानी ज़्यादा मिलने लगा। लेकिन अब भी कर्नाटक तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है।
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कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश
- जून में 9.19 टीएमसी फीट
- जुलाई में 31.24 टीएमसी फीट
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ASHOK SINGH RAJPUROHIT
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