केंद्र को सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों को मुद्रीकरण करने का अधिकार नहीं

इसके लिए देश भर में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन

By: Santosh Tiwari

Published: 10 Sep 2021, 11:06 PM IST

चेन्नई.

दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन के महासचिव एवं आल इंडिया रेलवे मेन फेडेरेशन के अध्यक्ष एन.कन्हैया ने दावा किया कि केंद्र सरकार को रेलवे व अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मुद्रीकरण का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। केंद्र सरकार ने प्रस्ताव किया है कि इस वित्तीय वर्ष से शुरू होकर अगले चार सालों तक परिसम्पत्ति मुद्रीकरण किया जाएगा। जिसमें रेलवे एव अन्य केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां होंगी। यह छह लाख करोड़ का होगा एवं उनके लीजिंग की अवधि 35 से 99 साल होगी। केंद्र सरकार की इस घोषणा से रेलवे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश है। वे इसका विरोध कर रहे हैं। बाहर लाख रेलवे कर्मचारियों ने देश भर में इसका विरोध किया। इसके लिए देश भर में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन हुआ। उन्होंने कहा कि चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एगमोर एवं ताम्बरम रेलवे स्टेशनों के मुद्रीकरण का प्रस्ताव है। इसके अलावा 90 सुपर फास्ट पैसेंजर ट्रेन, पेरम्बूर पानांतोप रेलवे कालोनी, ताम्बरम रेलवे कालोनी, 265 गुड शेड्स, ऊटी हिल ट्रेन, 1400 किलोमीटर रेलवे ट्रैक, कोंकण रेलवे, 15 रेलवे स्टेशन को लीज पर निजी क्षेत्र को देने का प्रस्ताव है। सरकार का चुनाव पांच साल देश को चलाने के लिए होता है ऐसे में वह कैसे 35 से 99 साल के लिए लीज पर दे सकते हैं। उसके इसका कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

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