अब भीङ-भाड़ वाले इलाकों पर विशेष फोकस

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन शहर के भीड़ भाड़ वाले हिस्सों में अधिक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे प्रदान करने की योजना बना रहा है

By: Vishal Kesharwani

Updated: 12 Jul 2021, 04:54 PM IST


- सड़क पुल व बुनियादी ढांचा किया जाएगा मजबूत
- मास्टर प्लान की वजह से निगम को जमीन के लिए करना पड़ रहा इंतजार
चेन्नर्ई. ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन शहर के भीड़ भाड़ वाले हिस्सों में अधिक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे प्रदान करने की योजना बना रहा है। लेकिन इंजीनियरों को उन क्षेत्रों में गंभीर जगह की कमी का सामना करना पड़ रहा है जहां शहर के मास्टर प्लान ने ऐसी परियोजनाओं के लिए भूमि निर्धरित की है। योजना के अनुसार निगम ने पेरम्बूर के स्टीफेंसन रोड के ओटेरी नाले पर एक पुल पर काम करना शुरू किया था।

 

इस परियोजना से उस क्षेत्र में यातायात प्रवाह में सुधार की उम्मीद की जा रही है। पुल पर एक अलग साइकिल ट्रैक के निर्माण योजना को लेकर स्थानीय लोग बेहद खुश हैं। लेकिन इस परियोजना को अभी रोक दिया गया है, क्योंकि एक डेवलपर ने भूमि का एक हिस्सा निगम को अभी तक नहीं प्रदान किया है।

 


संयोग से चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीएमडीए) द्वारा दूसरे मास्टर प्लान में ऐसे भूमि पार्सल को पहले ही स्ट्रीट अलाइनमेंट के रूप में निर्धारित किया गया है। वर्गीकरण का मतलब है कि उक्त भूमि किसी भी डेवलपर या निवासी द्वारा सीएमडीए और बाद में निगम को सड़क चौड़ीकरण, पुल निर्माण या इसी तरह की सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए उपहार में दी जाती है। बदले में डेवलपर को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) दिया जाता है ताकि वे शहर में कहीं और उपयोग कर लें। जब डेवलपर भवन निर्माण की अनुमति मांगता है तो उसे उपहार विलेख के रूप में भूमि देनी होती है।

 


-ओटेरी नुल्लाह ब्रिज से संबंधित मामले में नहीं मिली है भूमि
निगम के एक अधिकारी ने बताया कि ओटेरी नुल्लाह ब्रिज से संबंधित मामले में डेवलपर ने निगम को अब तक भूमि नहीं दी है, क्योंकि अब तक भवन निर्माण की अनुमति ही नहीं मांगी गई है। हालांकि जमीन मिलने के बाद भी निगम अभी परियोजना के साथ आगे बढऩे में सक्षम नहीं होगा, क्योंकि यह मास्टर प्लान का हिस्सा बन चुका है। निगम ने सीएमडीए को एक पत्र लिख स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या भूमि पार्सल का अब उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि इसे मास्टर प्लान में पहले ही चिह्नित किया जा चुका है। निगम को विरुगमबमक्कम के कालीअम्मन कोइल स्ट्रीट चौड़ीकरण परियोजना में भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा था।

Vishal Kesharwani
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