कोरोना संक्रमण - बचाव ही उपाय है पर रखें विश्वास

हाईकोर्ट CHIEF JUTICE की अपील

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चेन्नई. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अधिवक्ताओं, याचियों और हाईकोर्ट परिसर में आवाजाही करने वालों से अपील की कि इस चिकित्सीय आपात स्थिति में वे परम्परागत नारे को याद रखें कि बचाव ही उपचार है।न्यायालय ने साथ ही दूरी बनाए रखने और अन्य रोग प्रतिरोधी उपाय करने की सलाह भी दी।

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मुख्य न्यायाधीश एपी शाही ने ‘एक सोच और एक विनम्र आग्रह’ शीर्षक वाले पत्र में लिखा कि रोकथाम ही इस समय जांच का साधन है और एकमात्र उपाय यह है कि हम भीड़ से दूर रहें। हमें यह महसूस करना होगा कि हम हमारी और दूसरों की परवाह करते हुए दूरी बनाए रखें। अनुशासित जीवन के मायने बड़े सख्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर स्वयं पर काबू रखना। अनुशासन रहने के लिए यह बहुत जरूरी है।
उन्होंने लिखा संगठन की स्वतंत्रता हमने बड़े संघर्ष के बाद हासिल की है तथा इसको नियंत्रित करने का कोई भी प्रयास भडक़ाऊ होगा। एक फ्रेंच दार्शनिक और गणितज्ञ का जीवन दर्शन था कि हमें यह समझना होगा कि हमें क्या अपनाना और क्या छोडऩा है? यह उस वक्त बेहद जरूरी है जब पूरा विश्व इस मौजूदा स्थिति को लेकर अनिश्चित है। पूरी मानव समुदाय के लिए एक खतरा पैदा हो गया है जिसका कोई चिकित्सीय उपचार नहीं है।


मुख्य न्यायाधीश ने सोशल डिस्टेंसिंग को पीड़ादायक तो माना लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए इसे जरूरी बताया। इसे जीवन त्यागना अथवा जीने से रोकना नहीं समझा जाए। यह आपके और अन्य लोगों के जीवन के संरक्षण के लिए है। आपको इस परिस्थिति के माकूल स्वयं को साबित करना होगा। हम सबको एक साथ खड़ा होना है जो कि हमारा कर्तव्य है। यह उत्तरदायित्व केवल सरकार का नहीं है बल्कि हमारी भी सामूहिक और निजी जिम्मेदारी है।

P S Kumar Editorial Incharge
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