बारिश में आरक्षण पर उमड़ता सियासी बवाल

- राजभवन में 7.5 प्रतिशत का आरक्षण बिल

By: Santosh Tiwari

Updated: 28 Oct 2020, 08:19 PM IST


- मुख्यमंत्री ने की विपक्ष की आलोचना
चेन्नई.
तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश के बीच मेडिकल कोर्स में सरकारी विद्यार्थियों को 7.5 प्रतिशत आरक्षण के बिल पर सियासी बवाल कट रहा है। विधानसभा में पारित राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के पास मंजूरी के लिए लम्बित है। राज्यपाल से भेंट और पत्रों के माध्यम से बिल पर शीघ्र अनुमति मांगी जा रही तो दूसरी ओर सत्ता और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी सातवें आसमान पर है। डीएमके के शनिवार को आहूत राजभवन घेराव के एक दिन पहले मुख्यमंत्री एडपाड़ी के. पलनीस्वामी ने नेता प्रतिपक्ष एम. के. स्टालिन पर धावा बोला कि वे इस मसले पर घडिय़ाली आंसू बहाकर राजनीतिक स्वार्थ तलाश रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वक्तव्य में कहा नीट पास करने के बाद भी सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के वरीयता सूची में स्थान नहीं बना पाने और निजी स्कूल के छात्रों से पिछड़ जाने की वजह से ही 21 मार्च 2020 को उन्होंने विधानसभा में इनको आरक्षण देने की घोषणा की थी। विधानसभा में सभी दलों के समर्थन से 7.5 प्रतिशत के भीतरी आरक्षण के बिल का मसौदा पारित कर 18 सितम्बर को राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा गया।
पलनीस्वामी ने कहा कि 5 अक्टूबर को राज्यपाल की कुशलक्षेम पूछने के साथ ही उनसे इस बिल पर अनुमति देने का आग्रह किया गया था। 20 अक्टूबर को मंत्रियों के समूह ने इस सिलसिले में उनसे भेंट की। नीट के नतीजे आने और मेडिकल दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के साथ हमें उम्मीद है कि राज्यपाल से जल्द ही इस बिल को अनुमति मिल जाएगी।
सीएम ने विपक्षी दलों पर तंज कसा कि पिछले नौ सालों में 1400 नई मेडिकल सीटें और 11 मेडिकल कॉलेज स्थापना की मंजूरी हासिल कर अतिरिक्त 1650 सीटों की व्यवस्था करने वाली एआईएडीएमके सरकार पर राज्यपाल पर दबाव नहीं बनाने का आरोप लगाने वाली डीएमके और कांग्रेस यह भूल गई कि देश में नीट व्यवस्था थोपने का श्रेय उनको ही जाता है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को अवसरों की समानता और सामाजिक न्याय मिले इसलिए न्यायविदों से परामर्श के बाद यह आरक्षण बिल पारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्टालिन को आड़े हाथ लिया कि कोरोना नियंत्रण पर काबू पा चुकी सरकार की प्रशंसा और अब इस आरक्षण बिल पर भी सफलता हासिल होती देख वे ईष्र्यावश विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर बैठे हैं। जब मक्खन निकलने का समय होता है तो ताल ठोकने लोग आ ही जाते हैं। ऐसा ही आचरण स्टालिन का भी है जो सबकुछ सही जाता देख जनहितैषी होने के घडिय़ाल आंसू बहाते हुए आरक्षण मामले में राजनीतिक लाभ खोज रहे हैं।

Santosh Tiwari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned