छीन ली रोजी-रोटी

फाकाकसी में जीने को मजदूर श्रमिक महिलाएं

By: Ashok Rajpurohit

Published: 15 Oct 2020, 10:06 AM IST

चेन्नई. लॉकडाउन एवं कोरोना महामारी ने हर वर्ग पर असर डाला है। सबसे खराब स्थिति मजदूरों की है। वे लम्बे समय से बेरोजगार है। कई दिन से कोई काम न होने से खाने के लाले पड़ने लगे है। नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स मूवमेन्ट के अनुसार राज्य में घरेलु श्रमिक के रूप में पंजीकृत 70 फीसदी श्रमिक नौकरी खो चुके हैं।
कमला (बदला हुआ नाम) सात महीने से घर पर है। उसे कोई नौकरी नहीं मिल रही। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। इसकी उम्र भी काम में आड़े आ रही है। सरकार की ओर से न पेंशन मिल रही है और न कोई मदद मिली है।
कई महिलाएं घरों में जाकर काम करती थी लेकिन लॉकडाउन के बाद से कई जगह से उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। लोग संक्रमण के डर से नौकरी पर नहीं रख रहे हैं। खासकर ऐसी महिलाएं जो अधिक उम्र की हैं उन्हें संक्रमण जल्दी होने की संभावना रहती है। पहले वे एक घंटे काम के सौ रुपए कमा लेती थी।
नहीं मिल रही पेंशन
ऐसे लोगों ने उनकी आजीविका के लिए प्रबंध करने की मांग की है ताकि परिवार का गुजारा हो सके। या अन्य कोई वैकल्पिक काम देने की मांग की है। डिजीटलीकरण के चलते ऐसी श्रमिक महिलाएं अपना पंजीकरण भी कराना नहीं जानती। वे कम पढ़ी लिखी है। उन्हें सरकार की कई योजनाओं के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होती।
गुजर-बसर में परेशानी
नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स मूवमेन्ट एंड एसोसिएशन की समन्वयक वलरमति कहती है, ये योजनाएं आधार मांगती है जिसमें फोन पर ओटीपी आता है और बाद में पंजीयन हो पाता है। ऐसे में वे इसका लाभ भी कम ही उठा पाती है। वे कहती है, लॉकडाइन के चलते श्रमिक महिलाओं की रोजी-रोटी छीनने से वे फापातकालीन काकसी में जीवन गुजारने को मजबूर है। निकट समय में उनके लिए रोजगार मिलने की संभावना भी कम नजर आ रही है।

Ashok Rajpurohit
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