#corona virus : बंद के कारण प्रभावित हुए मिड डे मील पाने वाले बच्चे

Corona virus के कारण स्कूलों में छुट्टी की घोषणा से मिड डे मील पाने वाले लगभग 48 लाख बच्चे प्रभावित हुए हैं।

चेन्नई. कोरोना वायरस के कारण स्कूलों में छुट्टी की घोषणा से मिड डे मील पाने वाले लगभग 48 लाख बच्चे प्रभावित हुए हैं। ज्ञातव्य है कि निचले आर्थिक स्तर के बच्चों को सरकारी स्कूलों में दोपहर के भोजन की सुविधा थी। जिसके कारण उनके लिए एक वक्त के खाने का प्रबंध हो जाता था। पिछले एक सप्ताह से राज्य सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थाओं की छुट्टी घोषित कर दी है । अब ये बच्चे सरकार से मिलने वाले पोषाहार से वंचित हो गए है। कई अभिभावकों ने बच्चों के लिए सूखा राशन घर तक पहुंचाने के लिए सरकार से मांग की है। राज्य सरकार आंगनवाड़ी के पंजीकृत बच्चों के लिए ये सुविधा उपलब्ध करवा रही है। पोषाहार योजना में प्राथमिक स्कूलों के 5 से 9 साल के और उच्च माध्यमिक में कक्षा 10वीं तक के 15 साल की उम्र तक के बच्चों को स्कूल में सप्ताह में पांच दिनों के लिए पोषाहार दिया जाता है। जिसमें वेजिटेबल बिरयानी, सांबर चावल, टौमेटो राइस, टर्मरिंड राइस, करी लीफ राइस(कड़ी पत्ते वाला चावल), मिक्स्ड मील मेकर वेजिटेबल राइस(सोयाबड़ी और सब्जियों वाला पुलाव), उबला अंडा और उबला आलू शामिल है।

खड़ा हुआ प्रश्न

अब लॉकडाउन की घोषणा के बाद सरकारी स्कूलों में दोपहर के भोजन के लिए पंजीकृत 48.56 लाख बच्चों के अभिभावकों के आगे यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है। इन लागों के लिए सामान्य परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए दो जून की रोटी जुटाना भी कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में इन बच्चों के लिए पोषाहार कहां से आएगा। इन लोगो का कहना है कि यूं तो सरकार ने 31 मार्च तक के लिए ही बंद की घोषणा की है लेकिन वायरस के प्रभाव के कारण अभी कुछ भी निश्चित नहीं है। इसलिए राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी की तरह ही दोपहर के भोजन के लिए पंजीकृत बच्चों के लिए सूखे राशन को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करना चाहिए।

Corona virus Corona virus Impact corona virus in india
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shivali agrawal
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