नीलगिरी में 47 फीसदी और चेन्नई में 36 फीसदी लोगों ने एक खुराक ली है

नीलगिरी में 47 फीसदी और चेन्नई में 36 फीसदी लोगों ने एक खुराक ली है
- वैक्सीनेशन एक समान नहीं
- वैक्सीन की कमी सबसे बड़ी बाधा
- तमिलनाडु में 6.06 करोड़ वयस्क जिन्हें 12.12 करोड़ खुराक की जरुरत

By: ASHOK SINGH RAJPUROHIT

Published: 21 Jul 2021, 12:08 AM IST

चेन्नई. नीलगिरी में कम से कम 47 फीसदी और चेन्नई में 36 फीसदी लोगों ने कम से कम एक खुराक ली है। वैक्सीनेशन हालांकि एक समान नहीं हैं। कम से कम नौ स्वास्थ्य इकाइयों में 20 फीसदी से कम आबादी का वैक्सीनेशन हुआ है। कम से कम 26 स्वास्थ्य इकाइयों में 5 फीसदी से कम आबादी का वैक्सीनेशन हुआ है।
सोमवार की सुबह 3.42 लाख खुराक बची थीं। अगरअगला बैच जल्द नहीं मिला तो मंगलवार तक कई जिलों में वैक्सीन नहीं लग पाएगी। तमिलनाडु में प्रत्येक वयस्क में से लगभग एक को पिछले छह महीनों में एंटी-कोविड वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिली है, हालांकि केवल 6 फीसदी आबादी को ही दूसरी डोज मिल सकी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि अपेक्षित तीसरी लहर के बीच अपर्याप्त वैक्सीनेशन एक खतरा बना हुआ है।
वैक्सीन से टला संक्रमण का खतरा
तमिलनाडु में 6.06 करोड़ वयस्क हैं जिन्हें 12.12 करोड़ खुराक (प्रत्येक में दो खुराक) की आवश्यकता है। 15 जनवरी से 18 जुलाई तक निजी अस्पतालों में 12.5 लाख सहित 1.9 करोड़ डोज दिए गए। विदेश में वैक्सीन लगाने एवं नहीं लगाने वालों में बड़ा अन्दर दिखा। वैक्सीन लगाने से न केवल अस्पतालों में भीड़ कम हुई है बल्कि संक्रमण का खतरा भी टला है।
नहीं मिली बुजुर्गों को प्राथमिकता
उपलब्ध वैक्सीन के साथ लोगों, विशेष रूप से बुजुर्गों और कॉमरेडिडिटी वाले लोगों को प्रतिरक्षित करने से उच्च प्रतिरक्षा (एंटीबॉडी और टी-सेल प्रतिरक्षा दोनों) हो सकती है। लेकिन उन लोगों को प्राथमिकता देने के बजाय हमने सभी वयस्कों को कमी के बावजूद वैक्सीन की अनुमति दी।

ASHOK SINGH RAJPUROHIT
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