ठीक होने के बाद श्वसन तंत्र, फेफड़े व मस्तिष्क को चोट पहुंचा रहा कोरोना वायरस

- कोरोना से जंग जीतने के बाद भी संघर्ष

By: PURUSHOTTAM REDDY

Published: 26 Aug 2020, 05:32 PM IST

चेन्नई.

तमिलनाडु में 80 प्रतिशत से अधिक लोग कोरोना से जंग जीत चुके है लेकिन वायरस को मात देकर घर लौटने वाले सभी मरीज पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। सॉर्स सीओवी-2 वायरस नया है और यह खतरनाक साबित हो रहा है। चेन्नई में ठीक होने वाले कई मरीजों में यह वायरस मनुष्य के श्वसन तंत्र, फेफड़े, मस्तिष्क और जैसे महत्वपूर्ण अंगों में खून का थक्का भी जमा देता है। इसके चलते मरीजों को सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन अब नए ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि कोविड-19 से गंभीर रूप से पीडि़त मरीजों के शरीर के दूसरे अंगों को भी कोरोना वायरस ने नुकसान पहुंचाया है।

बीमारी का स्तर
कुछ लोगों को बिना किसी स्पष्ट कारण के 5 सप्ताह तक और कई बार इससे कम या ज्यादा समय के लिए फीवर आता रहता है। यह बुखार वाकई परेशान और कन्फ्यूज करने वाला है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट कारण अभी तक देखने को नहीं मिले हैं। कुछ लोगों को लगातार थकान बनी रहती है, वे खुद को बहुत की कमजोर अनुभव करते हैं और अपनी दैनिक जरूरत के कामों को करने में भी असहाय अनुभव करते हैं।

कोरोना से ठीक हुए मरीजों को हो रही हार्ट से संबंधित परेशानियों का ट्रीटमेंट कर रहे डॉक्टर्स का कहना है कि इस तरह के मरीजों में हार्ट से संबंधित एक समस्या सबसे अधिक देखने को मिल रही है और वह है हार्ट के टिश्यूज पर सूजन आना। इस बीमारी का स्तर हर मरीज में अलग-अलग हो सकता है। मतलब माइल्ड, मेजर और हाई। साथ ही समस्या इन मरीजों के हार्ट की राइट साइड में अधिक देखने को मिल रही है।

फॉलो-अप क्लीनिक में आ रहे मरीज
फ्रंटलाइन डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों के हृदय, तंत्रिकाओं, दिमाग, नसों, और किडनी पर भी असर हुआ है। स्टेनली सरकारी अस्पताल के कोविड-19 वार्ड के नोडल अधिकारी डा. रवि का कहना है कि इस बीमारी का संक्रमण ठीक होने के बाद व्यक्ति को हार्ट, किडनी या लिवर से संबंधित बीमारियां देखने को मिल रही हैं। स्टेनली अस्पताल में फॉलो-अप क्लिनिक में 15 मरीज दोबारा पहुंचे हैं जो कोरोना से पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके थे।

अभी वे फॉलोअप क्लिनिक में सांस लेने में तकलीफ की समस्या के साथ पहुंचे है। उनकी देखभाल की जा रही है डा. रवि का कहना है कि संक्रमण ठीक होने के बाद इन बीमारियों से बचने का तरीका हेल्दी डायट और हैपी माहौल है। जल्द ही इन समस्याओं से बचाव का कोई समाधान निकल आएगा।

केस-वन
चेन्नई के माधवरम की रहने वाली 32 वर्षीया पुष्पा (परिवर्तित नाम) 6 जून को कोरोना संक्रमित होने के बाद होम क्वारंटाइन में थी। 22 जून को होम क्वारंटाइन अवधि पूरा होने के बाद वह सामान्य जीवन जीने लगी। उसके बाद उसे महसूस हुआ कि उसके अंगों में दर्द हो रहा है। थोड़ा काम करने पर थकान महसूस होता था। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद भी कोरोना संक्रमण के लक्षण खत्म नहीं हुए थे। उसे एहसास हुआ कि वह ब्रेन फॉग की चपेट में है।

ब्रेन फॉग ऐसी बीमारी है जिसमें आपके सोचने की क्षमता इफेक्ट हो जाती है। छोटी चीजों को याद रखना और उन्हें भूल जाना ये सभी ब्रेन फॉग के लक्षण हैं। हालांकि उसने इलाज नहीं कराया।

केस-टू
कोडम्बाक्कम के रहने वाले 26 वर्षीय मुरलीधरन (बदला हुआ नाम) को कोविड-19 संक्रमण होने के बाद कोविड केयर सेंटर में रखा गया था। डिस्चार्ज होने के बाद उसे अचानक रह रहकर चक्कर आने लगते थे। उसका कहना है कि रोज सुबह उठता हूं तो ऐसा लगता है बुखार से पीडि़त हूं, शाम होने तक चक्कर आने लगते हैं।

PURUSHOTTAM REDDY
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