Tamilnadu गाड़ी, बंगला और गहने बेच डॉक्टर बन गई गौसेविका!

इन्होंने वर्ष २००६ में संभवनाथ गौशाला (Sambhavnath Goshala) को शिफ्ट कर दिया। फिलहाल यहां गायों की संख्या (Quantity of Cows) ८५० तक पहुंच गई। इसके अलावा २०० भैंसें व २० बकरियां भी हैं।

चेन्नई. भारत में देवतुल्य गौ माता की सेवा की 'साधनाÓ में लीन एक महिला डॉक्टर ने अपना गाड़ी, बंगला और गहने बेच दिए। यह तो कुछ भी नहीं उन्होंने अपने डॉक्टरी पेशे को भी अलविदा कह दिया। राजस्थान पत्रिका ने गौसेवा के लिए पूरी तरह समर्पित डा. साधना राव से उनके इस सफर पर चर्चा की तो कई प्रेरणास्पद बातें निकल कर आईं।
कर्नाटक के मेंगलूरु में १९४५ में जन्मीं साधना राव की स्कूली शिक्षा चेन्नई में हुई। उनके पिता ने मईलापुर में संभवनाथ गौशाला शुरू की। ग्यारहवीं पास करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए लंदन चली गई जहां उन्होंने डॉक्टरी की शिक्षा पूरी की। एलोपैथी के अलावा साधना राव ने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक उपचार प्रणाली भी सीखी।
शंकराचार्य का परामर्श
जब वे सर्जन थी उसी दौरान उनके पिता एवं गुरु कांची शंकराचार्य ने उनको गौसेवा करने की सलाह दी। उनकी सलाह से वे १९७५ में सर्विस छोड़ चेन्नई लौटीं। यहां आकर उन्होंने पहले एनिमल वेलफेयर चेरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया जिसमें अपनी संपत्ति बेचकर एक करोड़ रुपए का निवेश किया। उसके बाद उन्होंने करोड़ों का बंगला देकर नीलांगरै में जमीन ली और मईलापुर गौशाला को नीलांगरै स्थानांतरित किया। फिर गौसेवा के लिए गाडिय़ां एवं गहने आदि भी बेच दिए। उस समय उनके पास करीब ७० गायें थी। इसके बाद उन्होंने बूचडख़ाने जाने वाले गौवंश को छुड़ाकर अपनी गौशाला लाना शुरू कर दिया जिससे गौशाला में गायों की तादाद बढ़ गई।
२००६ में उत्तकोट्टै में गौशाला
जब गायों की संख्या बढ़कर करीब ४०० तक हो गई तो उनके मित्र साईंभक्त कैप्टन मुरलीधर जिनकी उत्तकोट्टै में चालीस एकड़ जमीन है ने गौशाला के लिए चार एकड़ जमीन लीज पर इनको दे दी। उस जमीन पर इन्होंने वर्ष २००६ में संभवनाथ गौशाला को शिफ्ट कर दिया। फिलहाल यहां गायों की संख्या ८५० तक पहुंच गई। इसके अलावा २०० भैंसें व २० बकरियां भी हैं। कैप्टन मुरलीधर ने बाकी ३६ एकड़ जमीन भी गायों के चरने के लिए दी हुई है। संभवनाथ गौशाला में गायों के लिए चार बड़े एवं १२ छोटे शेड बने हुए हैं। गायों की सेवा-सुश्रुषा में करीब ६० कर्मचारी लगे हैं, इनमें से आधे बिहार के निवासी हैं जो गौशाला में ही रहते हैं और आधे पास के गांव के हैं जो शाम को घर चले जाते हैं। गौशाला में एक बार गाय आ गई तो वह कभी बेची नहीं जाती।
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'गायों की सेवा ने मानसिक शांति और मोक्ष का रास्ता दिखा दिया है। भगवान से प्रार्थना है मानव का मन और दिल बदल दें जिससे अन्य जीवों को मानवता से प्यार मिल सके, करुणा के भाव विकसित हो जिससे वे जीवों की सेवा करें। गौसेवा का मौका भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है।
डा. साधना राव, गौ सेवक
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साधना राव संभवत: इकलौती गौशाला संचालक है जिसने अपनी सारी संपत्ति एवं गहने-बैलेंस सभी कुछ गायों की सेवा में समर्पित कर दी। ऐसे बहुत कम लोग हैं जो इतना बड़ा समर्पण कर सकते हैं। इनकी विशेषता है कि वे स्वयं भूखी रह सकती हैं लेकिन गायों को भूखी कभी नहीं रहने देती। हर व्यक्ति को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
- ललिता जांगड़ा, समाजेसवी, चेन्नई
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अपना सब कुछ बेचकर गायों की सेवा में लगाना हर व्यक्ति के वश की बात नहीं है। साधना राव एक ऐसी गौसेवी हैं जो तन-मन-धन से गायों को समर्पित हैं। ऐसे लोग विरले ही होते हैं। आज के समय में जब व्यक्ति एक गाय का पालन नहीं कर सकता, वे साढ़े आठ सौ गायों का पालन करती हैं जो प्रशंसनीय है।
- कला कोचर, समाजसेवी, चेन्नई

Dhannalal Sharma
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