फसलों को सूखा रहा 'पानीÓ डेल्टा और गैर डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की कमी

फसलों को सूखा रहा 'पानीÓ डेल्टा और गैर डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की कमी

P.S.Vijayaraghavan | Publish: Mar, 14 2018 07:14:06 PM (IST) Chennai, Tamil Nadu, India

- सांसत में किसान

चेन्नई. कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन को लेकर हो रही राजनीति के बीच धरतीपुत्रों का कलेजा कांपने लगा है। लाखों हेक्टेयर की फसल मुरझाने को है। पड़ोसी राज्य कर्नाटक से पानी नहीं मिलना इसका एक मूल कारण है। जबकि निकट भविष्य में बारिश के आसार नहीं। यह हालात तब है जब राज्य का भूजल स्तर पिछले साल की तुलना में सुधरा है। किसान अपनी उपज को बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। राज्य के धान उत्पादक प्रत्येक जिले में कमोबेस सिंचाई का संकट है।


प्रमुख धान-गन्ना उत्पादक और कावेरी डेल्टा वाले जिले तंजावुर में १ लाख २३ हजार ३६८ हेक्टेयर पर सम्भा और तलड़ी फसल की बुवाई हुई है। १.०८ लाख हेक्टेयर सिंचित है जबकि १५८६८ हेक्टेयर पर खड़ी फसल सूखी है। जिले में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी सामान्य सुधार हुआ है। ऐसे में इस साल उत्पादन का निर्धारित लक्ष्य हासिल करना कठिन है। कुंभकोणम के निकट मरुत्तुवकुड़ी के कृषक टी. मुरुगेशन के अनुसार उत्पादकता का स्तर इस बार प्रति हेक्टेयर ३२५० किलो रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार बारिश का दौर अधिक रहा है जिसका हल्का फायदा दिखाई दिया है। लेकिन उत्पादकता का यह स्तर पूरे जिले में असमान है। जिले कक्करै निवासी आर. सुकुमारन करते हैं कि उत्पादन कम हुआ है। ओरत्तनाडु में ज्यादा क्षेत्र में बुवाई होने के बाद उपज कम हुई है। जबकि ६३९० हेक्टेयर क्षेत्र पर की फसल तो सूख गई है। सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र पेराऊरनी, तिरुवोणम और सेतुबावाछत्रम ब्लॉक रहे हैं।


छह लाख एकड़ को चाहिए सिंचाई
कावेरी के पानी के बगैर डेल्टाई तंजावुर, तिरुवारुर, नागपट्टिनम और तिरुचि जिलों में एक लाख एकड़ में बोई गई फसल जलाभाव से ग्रस्त है। जबकि रामनाथपुरम, शिवगंगा और पुदुकोट्टै जिलों में ५ लाख एकड़ में बुवाई हुई है और पूरी फसल खतरे में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार डेल्टा रीजन में मुश्किल से १२.८५ लाख एकड़ में बुवाई हो पाई है। गत सोमवार करीब ५० फीसदी क्षेत्र की सिंचाई हो चुकी थी। पचास फीसदी असिंचित क्षेत्र होने का बड़ा कारण कर्नाटक और मेटूर से सिंचाई के लिए पानी नहीं खोला जाना है।
उधर, तुत्तुकुड़ी जिले के भी यही हाल है। जिले की ३३२३ एकड़ कृषि भूमि को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले के मुत्तलैमोझी, तेनकरैकुलम, नोच्चीकुलम, कीळपुत्तुकुलम, वेल्लरिकैऊरनी व तेमनकुलम झीलों का पानी सूख चुका है। इन जलस्रोतों में पानी नहीं होने के कारण ३३२३ एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए जल अनुपलब्ध है। किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि पापनाशम और मणिमुत्तार बांध से पानी छोड़ा जाए।


बारिश का एक दौर जरूरी
कर्नाटक के साथ कावेरी जल विवाद के बीच तिरुचि जिले में कावेरी का पानी सूख गया है। सिंचाई के साथ ही पेयजल के लाले पड़ गए है। किसानों का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। केंद्र सरकार सीएमबी को लेकर शांत है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के तहत ६ सप्ताह में सीएमबी का गठन होना है। हालांकि काफी हद तक फसलों को पानी नसीब हुआ है लेकिन अभी भी पूरी फसल तैयार होने के लिए बारिश का एक दौर जरूरी है। हर बार सिंचाई के लिए मेटूर बांध से १२ जून को पानी छोड़ा जाता है। पिछले साल २ अक्टूबर को पानी खोला गया। जल का प्रवाह २८ जनवरी से बंद है। डेल्टा जिलों के किसानों की मांग है कि खड़ी फसल बचाने के लिए १५ टीएमसी फीट पानी छोड़ा जाए।

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