राखी की दुकानों पर जुटने लगी महिलाओं की भीड़

राखी की दुकानों पर जुटने लगी महिलाओं की भीड़

shivali agrawal | Updated: 13 Aug 2019, 02:31:31 PM (IST) Chennai, Chennai, Tamil Nadu, India

भाई-बहिन के प्यार का यह त्यौहार Chennai समेत पूरे देश में गुरुवार को ही मनाया जाएगा। त्यौहार के नजदीक आते ही महानगर के प्रसिद्ध व्यावसायिक इलाकों साहुकारपेट, पुरूषवाक्कम, चूलै, टी.नगर, माधवरम समेत अन्य उपनगरों में भी राखियों की दुकानें सज गई है।

चेन्नई. इस बार रक्षाबंधन RakshaBandhan का त्यौहार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन ही है। भाई-बहिन के प्यार का यह त्यौहार चेन्नई (Chennai)समेत पूरे देश में गुरुवार को ही मनाया जाएगा। त्यौहार के नजदीक आते ही महानगर के प्रसिद्ध व्यावसायिक इलाकों साहुकारपेट, पुरूषवाक्कम, चूलै, टी.नगर, माधवरम समेत अन्य उपनगरों में भी राखियों की दुकानें सज गई है। रक्षाबंधन का सबसे अधिक रस खासकर हिन्दी बाहुल्य साहुकारपेट में देखा जा सकता है जहां मिंट स्ट्रीट, पेरिया नायकन स्ट्रीट, चिन्ना नायकन स्ट्रीट, एनएससी बोस रोड आदि में बड़ी संख्या में राखियों की दुकानें सज गई हैं जिन पर कई नई डिजाइनों की राखियां महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं। हालांकि इन दुकानों पर न्यूनतम 10 रुपए से लेकर अधिकतम 500 रुपए तक की राखियां उपलब्ध हैं लेकिन महिलाओं की विशेष पसंद पैसे से नहीं चमक-दमक पर निर्भर है। रक्षाबंधन में केवल दो ही दिन शेष रहने के कारण भीड़ से बचने के लिए महिलाओं ने सोमवार से ही दुकानों पर राखियों की शुरू कर दी। मांग को देखते हुए दुकानदारों ने भी राखियों की दरों में काफी बढ़ोतरी कर दी है।
एक दुकानदार ऋषभ कुमार ने बताया कि राखियां खरीदने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं दुकानों पर आने लगी हैं। गत तीन चार दिन से उनकी दुकान पर हर रोज अच्छा व्यवसाय हो रहा है। साथ ही बताया कि अगले तीन दिन में बिक्री और बढ़ेगी। महिलाओं में राखियां खरीदने के प्रति काफी उत्साह नजर आ रहा है। मिंट स्ट्रीट में राखी खरीदने के लिए आई दिव्या कुमारी का कहना था कि उसके दोनों भाई बेंगलूरु में रहते हैं। उनकी राखियां बेंगलूरु ही भेजनी पड़ेगी इसलिए आज ही खरीद रही हूं। इनको कूरियर से भेजना है ताकि ये गुरुवार तक भाइयों को मिल जाएं। वहीं संजना जैन कहती हैं कि उनका पूरा परिवार चेन्नई में ही रहता है। जल्दी राखियां खरीदने का मूल कारण है अभी नया स्टॉक दुकानों में आया ही है इसलिए मनपसंद राखियां मिल जाएंगी। मैंने अपने भाइयों के लिए उनकी मनपसंद की राखियां खरीदी हैं। उनका कहना था कि यह त्योहार भाई-बहिन के रिश्ते की मधुरता का प्रतीक है। हम प्रवासी हिंदीभाषी जहां भी रहते हैं, हमारे लिए इस त्यौहार का बहुत महत्व है। राखी का धागा व्यक्ति को महसूस करवाता है कि बहन के लिए भाई की कितनी अहमियत है। राखी के धागे अनमोल हैं, ये धन से नहीं तोले जा सकते।
इसी प्रकार पुरुषवाक्कम में ताना स्ट्रीट में राखियां बेच रहे अमन कुमार का कहना था कि रक्षाबंधन में महज तीन दिन बचे हैं लेकिन अभी तक खरीददारों का खरीद के प्रति पूरी तरह आकर्षण नहीं हो पाया है। पूरे दिन में बमुश्किल करीब दो सौ राखियों कर बिक्री हो पाई है।
वहीं चिन्ना नायकन स्ट्रीट में राखी विक्रेता हर्षित का कहना था कि उनकी दुकान में दस से दो सौ रुपए तक की राखियां हैं। हालांकि महिलाओं की राखियां खरीदने वाली महिलाओं में वृद्धि होने लगी है। एक महिला खरीदार ज्योत्सना ने बताया हर साल रक्षाबंधन पर अपने भाइयों के अलावा अन्य रिश्तेदारों को भी राखी बांधने का प्रचलन है इसलिए दो दर्जन राखियां खरीदी हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार पांच दशक से भी अधिक समय से चेन्नई में प्रवासित है इसलिए राखियां भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन भाई बहन के बीच प्रेम का प्रतीक है जिसमें भाई बहन की रक्षा की शपथ लेते हैं।

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