पुलिस कस्टडी में पिता-पुत्र की संदिग्ध मौत का मामला मद्रास हाईकोर्ट ने एसपी को स्थिति रिपोर्ट देने का दिया निर्देश

तुत्तुकुड़ी जिले के सांताकुलम में पुलिस कस्टडी में पिता-पुत्र की हुई संदिग्ध मौत पर संज्ञान लेते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने बुधवार को तुत्तुकुड़ी पुलिस अधीक्षक (एसपी) से 26 जून को स्थिति रिपोर्ट प्रदान करने का निर्देश दिया।

By: Vishal Kesharwani

Published: 24 Jun 2020, 06:46 PM IST


मदुरै. तुत्तुकुड़ी जिले के सांताकुलम में पुलिस कस्टडी में पिता-पुत्र की हुई संदिग्ध मौत पर संज्ञान लेते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने बुधवार को तुत्तुकुड़ी पुलिस अधीक्षक (एसपी) से 26 जून को स्थिति रिपोर्ट प्रदान करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएम) की जांच रिपोर्ट और सील हुए कवर के साथ वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया। मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और तुत्तुकुड़ी एसपी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। जिसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता चेल्लापांडियन ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि डीजीपी मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग से बात कर रहे हैं।

 

उसके बाद साउथ जोन आईजी के.पी. षणमुगा राजेश्वरन और तुत्तुकुड़ी एसपी अरुण बालगोपाल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। आईजी षणमुगा राजेश्वरन ने बताया कि दो सब इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। एक इंस्पेक्टर को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है और सांताकुलम से जुड़े दो हैड कांस्टेबल के खिलाफ विभागिय कार्रवाई की जा रही है। एसपी अरुण बालगोपाल ने बताया कि वर्तमान की स्थिति शांत है और लोगों को पुलिस की कार्रवाई पर यकिन है। उन्होंने कहा कोविलपट्टी न्यायिक मजिस्टे्रट द्वारा तिरुनेलवेली सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पूछताछ की जा रही है। प्रस्तुतियों पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश पी.एन. प्रकाश और न्यायाधीश बी. पुगलेंदी की खंडपीठ ने मौखिक रूप से अवलोकन किया कि कोविड 19 महामारी के दौरान सड़क पर फेरीवाले और दैनिक ग्रामीणों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान लोगों के इलाज में एक मानवीय दृष्टिकोण को अनुकूलित किया जाना चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा एक लोकतांत्रित व्यवस्था में इस तरह की घटनाओं से लोगों में व्यापक असंतोष पैदा होगा।

 

न्यायाधीशों ने मौखिक रूप से राज्य सरकार और डीजीपी से इस तरह के हिरासत में होने वाली मौत को खत्म करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं के साथ आगे आने का निर्देश भी दिया। कोर्ट ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को बिना किसी हस्तक्षेप के जेएम की जांच में आवश्यक बुनियादी ढांचा और सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा अदालत के निर्देशानुसार तीन डॉक्टरों की टीम द्वारा ही पोस्टमार्टम होना चाहिए और उसका वीडियोग्राफी किया जाना चाहिए। कोविड 19 के प्रसार को मद्देनजर रखते हुए अंतिम संस्कार के दौरान सामाजिक दूरी का उल्लंघन नहीं करने का भी निर्देश दिया।

Vishal Kesharwani
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