scriptDakshin Bharat Hindi Prachar Sabha Madras | संस्कृति व साहित्य भाषाओं को जोड़ने का काम करते हैं | Patrika News

संस्कृति व साहित्य भाषाओं को जोड़ने का काम करते हैं

locationचेन्नईPublished: Nov 22, 2022 08:19:31 pm

शोध का स्वरूप एवं संभावनाएं विषयक विशेष व्याख्यान

Dakshin Bharat Hindi Prachar Sabha Madras
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चेन्नई. संस्कृति व साहित्य कभी किसी भाषाओं का विरोध नहीं करते। ये भाषाओं को जोड़ने का काम करते हैं। उत्तर भारत के लोगों को लगता है कि दक्षिण में हिंदी का विरोध है लेकिन केवल राजनीतिक रूप से ही हिंदी का विरोध होता रहा है। हमारी संस्कृति तो ऐसी रही है कि दक्षिण के लोग गंगा को पूजते हैं तो उत्तर में कावेरी की भी उतनी ही पूजा की जाती है।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखंड के पूर्व आचार्य प्रोफेसर योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण ने यह बात कही। वे सोमवार को यहां शोध का स्वरूप एवं संभावनाएं विषयक विशेष व्याख्यान दे रहे थे। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान तथा आंतरिक गुणवत्ता एवं आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में यहां टीनगर स्थित प्रचार सभा परिसर में आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि हम लोगों ने आपस में रेखाएं खींच दी हैं। यदि संस्कृति, साहित्य एवं धर्म की बात की जाएं तो सब एक ही है। जो दिल के रिश्ते होते हैं वे आपस में जोड़ने का काम करते हैं और पक्के होते हैं लेकिन राजनीति के रिश्ते टूट जाते है। वे स्वार्थ के रिश्ते होते हैं।
शोधे के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि शोध करना आसान नहीं होता। हमें अपनी बात को सिद्ध करना होता है। प्रमाण देना पड़ता है। जो खोया हुआ है उसे ढूंढना है। अज्ञान को ज्ञात करना, अल्पज्ञात को सुज्ञात करना और ज्ञात को सुज्ञात करना ही शोध है। उन्होंने कहा कि तुलनात्मक शोध खासा महत्वपूर्ण होता है। यह आसान नहीं है। हम लोकभाषा में भाषा के विकास को देखते हैं। नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है। जब तक लोकभाषा नहीं आती तब तक तुलनात्मक नहीं कर सकते। लोक साहित्य आपके जीवन की प्राण होती है। लोक साहित्य परम्परा से आता है।
समारोह के अध्यक्ष दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के कुलसचिव प्रोफेसर प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि शोध को लेकर जिज्ञासा होनी चाहिए। विषय पर पूरा ज्ञान प्राप्त करें। हमें टेबल वर्क से ज्यादा फिल्ड वर्क करना है। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के आंतरिक गुणवत्ता एवं आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. सुभाष राणे तथा एमओपी वैष्णव महिला महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधा त्रिवेदी विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद थीं।
कार्यक्रम के संयोजक तथा दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष एवं आचार्य प्रोफेसर मंजूनाथ एन. अंबिग ने स्वागत भाषण दिया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरजा गुरमकोन्डा ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। सहायक प्रोफेसर डॉ. सविता घुडकेवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. मृत्युंजय ने किया। इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर डॉ. जयश्री एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. संतोषी समेत अन्य प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
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