तमिलनाडु में रक्षा गलियारे से खुलेंगे निवेश और रोजगार के नए द्वार

- 4 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
- एक लाख पचास हजार करोड़ का होगा निवेश

By: Santosh Tiwari

Published: 10 Feb 2018, 09:28 PM IST



हाल ही केंद्रीय बजट में घोषित तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारा बनाने का प्रस्ताव 2030 तक चार लाख नए रोजगार के अवसर मुहैया कराएगा। इसके साथ ही 1 लाख 50 हजार करोड़ का निवेश होगा। पिछले तीन सालों से तमिलनाडु में रक्षा उत्पाद गलियारा लाने में अहम भूमिका निभाने वाले एसोचैम तमिलनाडु एवं सदर्न रीजन डवलपमेंट काउंसिल के को-चेयरमैन एवं प्रसिद्ध ला फर्म सुराणा एण्ड सुराणा के डॉ. विनोद सुराणा ने राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में इसकी विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया किसी भी देश की जनसंख्या, क्षेत्रफल, आर्थिक समृद्धि एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए। इनके आधार पर ही देश में रक्षा उपाय तय किए जाते हैं। पिछले 20 वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था का काफी विकास हुआ है। रक्षा आवश्यकताएं बढ़ी हैं। पड़ोसी देशों से भी देश की सुरक्षा करनी होती है। विश्वभर में एमएसएमई 70 से 80 प्रतिशत रक्षा सामग्री का उत्पादन करते हैं। रक्षा के क्षेत्र में देश में बड़े अवसर हैं।
बुनियादी सुविधाएं व सुपर कम्प्यूटर
सुराणा अपने केस स्टडी के आधार पर बताते हैं कि रक्षा उत्पादन हब के लिए उपयुक्त वातावरण और ईको सिस्टम विकसित करना होगा। राज्य सरकार को भी आगे आकर नीतियां बनानी होगी। आधारभूत सुविधाएं तथा डिजाइन-केंद्र पर काम करना होगा। रक्षा उत्पाद की सामग्री का जीवनकाल बताने के लिए सुपर कम्प्यूटर चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार ने नेशनल सुपर- कम्प्यूटर नीति बनाई है। तत्पश्चात एक प्रोडक्ट टेस्टिंग सेंटर तथा डाटा एनालिटिक सेंटर चाहिए। यहां भी एमएसएमई क्षेत्र में निवेश के व्यापक अवसर हैं। इसके अलावा क्वालिटी-कंट्रोल तथा डाक्यूमेंटेशन सेंटर चाहिए।
कौशल विकास केंद्र
उन्होंने अपने केस-स्टडी में पाया कि इसके लिए एक कौशल- विकास केंद्र भी होना चाहिए। यदि केंद्र व राज्य सरकारें ये सुविधाएं देती हैं तो ऑटोमोबाइल सेक्टर से भी कई गुना बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बन सकता है और 2030 तक हाईटेक्नोलॉजी का विकास होगा तथा कंपनियां पेट्रोल व डीजल के वाहन बनाना बंद कर देंगी। मौजूदा उद्योगों को बचाने के लिए भी रक्षा उत्पादन जरूरी बन जाएगा। यही नहीं रक्षा उत्पादन हब बनने से न सिर्फ आईटी और ऑटोमोबाइल उद्योग बचेंगे बल्कि लाखों लोगों की नौकरी बचेगी। विदेशी कंपनियां आईटी के क्षेत्र में आउटसोर्स बन्द कर देंगी। साथ ही आटोमोबाइल में व्यापक बदलाव आएगा। विशेष बैट्री आधारित तथा मानवरहित वाहन बनेंगे। आईटी वालों के लिए साइबर वारफेयर तथा इन्फारमेशन वार फेयर में अवसर मिलेंगे। इलेक्ट्रोनिक इंडस्ट्री को लाभ होगा।
तमिलनाडु में संभावनाएं
तमिलनाडु में अलाय्से धातु विशेष-मिश्र धातु (स्पेशलिटी आलोयस) उद्योग आ सकते हैं । केमिकल, स्पेशलिटी केमिकल, कोटिंग, नैनो टेक्नॉलोजी, सिल्वर नैनो टेक्नॉलोजी उद्योग क्षेत्रों में बड़े अवसर उभरकर सामने आएंगे। तमिलनाडु में इस हब के लिए माहौल पहले से है। यहां बेहतर शिक्षा है। विनोद सुराणा ने बताया कि इस प्रस्ताव को तमिलनाडु सरकार के समक्ष रखा गया। सरकार ने इसमें मदद की। दोनों सरकारों ने क्लस्टर बनाने की बात स्वीकारी है। इससे स्वदेशी तकनीक का विकास होगा। विदेशों पर निर्भरता कम होगी। लोगों को रोजगार मिलेगा। तत्कालीन रक्षा मंत्री अरुण जेटली को यह प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां चेन्नई में विनोद सुराणा के ला फर्म सुराणा एण्ड सुराणा द्वारा आयोजित 350 से भी अधिक उद्योगपतियों के साथ बैठक की। परिणाम केन्द्रीय-बजट में देश में दो रक्षा गलियारे बनाने की घोषणा के रूप में सामने आया। इनमें से एक तमिलनाडु में है। अगले 15 सालों में इससे एक लाख पचास हजार करोड़ का निवेश होगा। चार लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रबंधन, विज्ञान, इंजीनियरों को हाई टेक्नॉलोजी से जुड़े रोजगार के अवसर मिलेंगे। यहां न तो भूमि की कमी है न ही पूंजी की ऐसे पूरे तमिलनाडु का सर्वागीण विकास होगा। एमएसएमई के साथ संयुक्त उपक्रम शुरू किया जा सकता है। साथ ही रक्षा उत्पादन में कानून से जुड़े मामले भी अधिक हैं, ऐसे में कानूनी पेशेवर भी इससे लाभान्वित होंगे।

Santosh Tiwari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned