Tamilnadu धर्म के बिना जीवन शून्य समान

पुण्य के बिना (without punya) सुख नहीं मिल सकता और धर्माराधना (dharmaradhana) बिना पुण्य संचित नहीं हो सकता।

चेन्नई. वेपेरी स्थित गुरु श्री शांति अपार्टमेंट में विराजित साध्वी डा. हेमप्रभा ने कहा प्राप्ति की आशा सब में होती है लेकिन पुरुषार्थ कोई नहीं करना चाहता। सब कोई सुख चाहते हैं लेकिन पुण्य कोई नहीं करना चाहता। पुण्य के बिना सुख नहीं मिल सकता और धर्माराधना बिना पुण्य संचित नहीं हो सकता। इसलिए धर्मरूपी दीपक में श्रद्धा की बाती और ज्ञान की ज्योति परमावश्यक है।

मानव आधुनिक साधनों में बहुत अधिक व्यस्त
आज मानव आधुनिक साधनों में बहुत अधिक व्यस्त जबकि धर्माराधना में प्रमाद से ग्रस्त हो गया है। धर्म के बिना जीवन शून्य के समान है। धर्म है तो सब कुछ है। धर्म के लिए सम्मान ही नहीं समाधान भी चाहिए। ऊंचाई नहीं सच्चाई चाहिए। धर्म एक ऐसा साथ है जो कभी साथ नहीं छोड़ता।

अपनाएं जीवन निर्माण के लिए पांच सूत्र
साध्वी इमितप्रभा ने कहा यदि जीवन का निर्माण करना है तो पांच सूत्र अपनाने होंगे-अनुशासन, समयबद्धता, कठिन परिश्रम, संकल्प और विनम्रता। शुक्रवार को साध्वीवृंद यहां से प्रस्थान कर रिखबचंद, गौतमचंद व आनंदकुमार लोढा के निवास पर जाएंगी।

Dhannalal Sharma Desk
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