डीएमके के लिए आसान नहीं 2021 का चुनाव, सहयोगियों के साथ संतुलन होगा चुनौती भरा काम

डीएमके के लिए आसान नहीं 2021 का चुनाव
- सहयोगियों के साथ संतुलन होगा चुनौती भरा काम

By: Ashok Rajpurohit

Published: 16 Jan 2021, 10:25 PM IST

चेन्नई. जैसे ही तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नज़दीक आए है, ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार की लड़ाई भी दो प्रमुख द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द ही होनी है। जहां तक डीएमके की बात की जाएं तो 2019 के संसदीय चुनावों से पहले किए गए गठबंधन बरकरार रहेगा। इसका मतलब है कि डीएमके के साथ कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल रहेगे। इसके अलावा ऐसी अटकलें हैं कि पीएमके और एमजेके भी एआईएडीएमके के पाले से कूदकर डीएमके में शामिल हो सकते हैं। 2021 के लिए कई सहयोगी दलों के साथ डीएमके की पटरी बैठ पाना इतना आसान नहीं होगा।
डीएमके को अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों का तालमेल काफी चुनौती भरा हो सकता है। खासकर कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है। जिन 41 सीटों पर उसने चुनाव लड़ा, उनमें से कांग्रेस 2016 में तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनावों में सिर्फ 8 सीटें जीतने में सफल रही। राष्ट्रीय पार्टी 2020 के बिहार चुनावों के बाद आलोचनाओं के घेरे में आ गई थी, जब उसने 70 सीटों में से 19 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद महागठबंधन के आंकड़े को काफी नीचे ला दिया था। डीएमके नेता और राज्यसभा सांसद टीकेएस इलंगोवन ने कहा, हमने अभी तक सीटों को लेकर गठबंधन नहीं किया है।
डीएमके ने पिछली बार विधानसभा की 176 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एलंगोवन ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी को 2021 में और अधिक सीटों पर खड़े होने की जरूरत है। संख्या अभी तय नहीं हुई है। लेकिन हम अपने सहयोगियों को आश्वस्त करेंगे कि हमें अधिक संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ना है। सीट साझा करने की बातचीत शुरू नहीं हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2021 का चुनाव परिदृश्य 2016 से बहुत अलग है, और सिर्फ इसलिए नहीं कि जयललिता और एम करुणानिधि जैसे नेता अब नहीं हैं। तमिलनाडु में भाजपा का उदय इस बार समीकरण पलट सकता है। यह डीएमके एवं उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ा खतरा है।

अब राजनीति भाजपा के विकास के मुद्दे पर केंद्रित
प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक पी रामजयम ने कहा, अब राजनीति भाजपा के विकास के मुद्दे पर केंद्रित हो गई है। ऐसे में डीएमके के सहयोगी 2016 की तरह अडिग नहीं हो सकते। क्योंकि भाजपा की राजनीति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए डीएमके के सहयोगी इतने विशेष नहीं हो सकते हैं। डीएमके के साथ गठबंधन की वार्ता विफल होने के बाद डीएमडीके प्रमुख विजयकांत ने एमएनके के साथ गठजोड़ करने का फैसला किया था। उधर वीसीके एवं एमडीएमके ने मांग की है कि वे डीएमके के उगते सूरज के चुनाव चिन्ह की बजाय खुद की पार्टी के चिन्ह पर लडेगी।
डीएमके के टीकेएस इलंगोवन ने कहा कि इस मामले को सुलझा लिया जाएगा और गठबंधन के लिए प्राथमिकता एआईएडीएमके को सत्ता से हटाने की रहेगी। उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है कि वे अपने प्रतीक पर चुनाव लड़ें। वे पहले भी अपने सिंबल पर चुनाव लड़ चुके हैं। कभी-कभी वे हमारे दल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ते हैं।
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Ashok Rajpurohit
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