DMK सांसदों Baalu व Dayanidhi Maran पर २९ मई तक कार्रवाई से रोक

- कोयम्बत्तूर पुलिस को अंतरिम निर्देश

- दलितों पर टिप्पणी मामला

By: P S Kumar

Published: 23 May 2020, 06:53 PM IST


चेन्नई. राज्यसभा सांसद आर. एस. भारती की गिरफ्तारी और जमानत के बाद डीएमके के लोकसभा सांसदों टी. आर. बालू व दयानिधि मारन को मद्रास उच्च न्यायालय से २९ मई तक की अंतरिम राहत मिल गई। मामला दलितों पर टिप्पणी से जुड़ था जिस पर सुबह आर. एस. भारती की गिरफ्तारी हुई थी। उसके बाद दोनों नेताओं ने गिरफ्तारी टालने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली।


न्यायाधीश एम. निर्मल कुमार ने दोनों सांसदों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोयम्बत्तूर जिले की तूडीयलूर और वैरायटी हॉल पुलिस को निर्देश दिया कि २९ मई तक इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।


यह मामला १३ मई का है। मुख्य सचिव से भेंट के बाद डीएमके सांसदों ने कोविड-१९ की राज्य में स्थिति को लेकर प्रेसवार्ता की थी। उस वार्ता में उनकी ओर से दलितों को लेकर कुछ शब्द का उपयोग किया गया जिसकी सख्त प्रतिक्रिया हुई। इनके खिलाफ पुलिस थानों में एससी-एसटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी प्रकरण में राज्यसभा सांसद भारती की गिरफ्तारी के बाद बालू व मारन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया ताकि उनको गिरफ्तार नहीं किया जाए।


डीएमके सांसदों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन, एनआर इलंगो व एआरएल सुंदरेशन वीडियो कांफें्रसिंग के माध्यम से पेश हुए। अधिवक्ताओं ने जज से कहा कि यह प्राथमिकी राजनीतिक दुर्भावना की वजह से दर्ज की गई है। मुख्य सचिव से मिले इन सांसदों की शिकायत थी कि दलित तबके को राहत सामग्री नहीं मिली है। लिहाजा उन्होंने चीफ सेक्रेटरी को प्रतिवेदन भी दिया था कि तत्काल कार्यवाही की जाए।


अधिवक्ताओं ने दलील दी कि मुख्य सचिव ने कथित रूप से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तथा उचित व्यवहार नहीं किया था। इस वजह से सांसदों ने उनके खिलाफ लोकसभा के स्पीकर को विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का पत्र भेजा। इस पृष्ठभूमि में ही डीएमके सांसदों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।


डीएमके सांसदों के खिलाफ प्राथमिकी हनुमान सेना ग्रुप ने दर्ज कराई है जिससे स्पष्ट है कि यह राजनीति प्रेरित है इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।


बचाव पक्ष के लोक अभियोजक ए. नटराजन दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने एससी-एसटी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई लिहाजा इसमें जांच की आवश्यकता है।


न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यथास्थिति बनाए रखने के आदेश देते हुए पुलिस से कहा कि २९ मई तक इन सांसदों पर कार्रवाई नहीं की जाए तथा लोक अभियोजक से विस्तृत जवाब मांगा।

P S Kumar Editorial Incharge
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